
करोड़ों का निवेश, करोड़ों का घाटा
सूरत
एक एनआरआइ ने जीएसटी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उसने करोड़ों रुपए का निवेश कर भिलाड में यार्न का प्रोजेक्ट शुरू किया। जीएसटी के नियम के कारण उसे करोड़ों का नुकसान हो रहा है। यार्न के कच्चे माल पर 12 प्रतिशत और यार्न पर पांच प्रतिशत जीएसटी होने से हर महीने 60 लाख रुपए का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा इस पर आयकर भी भरना पड़ सकता है। ऐसे में मेक इन इंडिया कैसे सफल होगा। ओपन हाउस के दौरान कई बार उद्यमियों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्हें शांत कराना पड़ा।
परेशान करने की शिकायत
ओपन हाउस के दौरान प्लायवुड के व्यापारियों ने कहा कि जांच के नाम पर स्टेट जीएसटी के अधिकारी व्यापारियों को परेशान कर रहे हैं। प्लायवुड़ अन्य राज्यों से आता है। रास्ते में जीएसटी के अधिकारी माल पकड़ते हैं और वेल्युएशन का अधिकार नहीं होने पर भी माल की कीमत ज्यादा बताकर गलत ढंंग से टैक्स तथा पैनल्टी वसूल रहे हैं। कुछ मामलों में तो व्यापारी प्लायवुड की कीमत से भी ज्यादा टैक्स और पैनल्टी दे रहे हैं।
होटल उद्यमियों ने रखी मांग
साउथ गुजरात होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट सनत रेलिया ने कहा कि होटल के कमरों पर 12,18 और 28 प्रतिशत जीएसटी है। होटल में डिस्काउंट के बाद मूल रकम पर जीएसटी गिना जाता है। इससे ग्राहकों को गलतफहमी होती है। इसलिए वास्तविक ट्रांजेक्शन पर टैक्स की व्यवस्था की जानी चाहिए।
कुछ मुद्दों पर विचार, फैसला जल्द
जीएसटी विभाग की ओर से आए उच्च अधिकारी योगेन्द्र गर्ग और राज्य सरकार के जीएसटी कमिश्नर पी.डी. वाघेला ने बताया कि कपड़ा उद्यमियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड करने, आइटीसी-04 और रिटर्न प्रणाली सरल करने तथा व्यापारियों की पैनल्टी माफ करने के बारे में विचार चल रहा है। जल्द ही इन पर निर्णय आ जाएगा। सरकार व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है, इसलिए निराश होने की जरूरत नहीं है।
Published on:
13 Jul 2018 09:04 pm
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