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सूरत. कानूनी प्रक्रिया में समय-सीमा का पालन अनिवार्य बताते हुए सूरत की सक्षम अदालत ने एक अहम फैसले में जमीन विवाद से जुड़ा दावा खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून द्वारा तय समय-सीमा समाप्त होने के बाद दायर किया गया कोई भी दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता, चाहे दावा करने वाला व्यक्ति स्वयं को सही ही क्यों न मानता हो।
अधिवक्ता नरेश नावडिया के अनुसार, कामरेज तहसील की जमीन को लेकर विवाद सामने आया था। यह जमीन सर्वे नंबर 55, ब्लॉक नंबर 52 में स्थित है, जिसे लेकर मृतक दुलाभभाई परशोत्तमभाई पटेल के वारिसों द्वारा दावा किया गया था। संबंधित पक्ष ने आरोप लगाया था कि जमीन में उनका हिस्सा होने के बावजूद उन्हें हिस्सा नहीं दिया गया। हालांकि अदालत ने पाया कि विवादित जमीन को लेकर पूर्व में ही वर्ष 2017 में रजिस्टर्ड बिक्री दस्तावेज निष्पादित हो चुकी थी। इसके बावजूद लंबे समय तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। कानून के अनुसार, किसी भी रजिस्टर्ड दस्तावेज को चुनौती देने की अधिकतम समय-सीमा तीन वर्ष होती है, जबकि यह दावा तय समय-सीमा के काफी बाद दायर किया गया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यदि समय-सीमा की अनदेखी कर ऐसे दावों को स्वीकार किया जाए, तो समाज में हर लेन-देन और संपत्ति व्यवहार में अनिश्चितता पैदा होगी और कानूनी व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कमजोर होगा। इसी कारण लिमिटेशन एक्ट का सख्ती से पालन जरूरी है। मामले में प्रतिवादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश ए. नावडिया, भावेश नावडिया और संदीप मांगुकिया ने प्रभावी दलीलें पेश कीं। उन्होंने तर्क दिया कि एक बार रजिस्टर्ड दस्तावेज निष्पादित हो जाने के बाद और निर्धारित समय-सीमा बीत जाने पर उसे चुनौती नहीं दी जा सकती। अदालत ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए दावा पूरी तरह खारिज कर दिया।
Updated on:
3 Jan 2026, 8:04 PM IST
Published on:
3 Jan 2026, 8:04 PM IST
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