सोमनाथ ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि इस समय शतरंज में विश्व में 15वें क्रम के खिलाड़ी प्रज्ञानंदा आने वाले समय में नम्बर एक खिलाड़ी होंगे।
चेन्नई.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस सोमनाथ ने सोमवार को कहा कि शतरंज ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानंदा युवाओं के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए अंतरिक्ष एजेंसी के साथ काम करेंगे। सोमनाथ ने यहां युवा शतरंज खिलाड़ी प्रज्ञानंदा से उनके आवास पर मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा, हमें गर्व है कि हमारे पास एक प्रज्ञान चंद्रमा पर है और जमीन पर प्रज्ञानंदा है। हमने भारत के लिए जो चंद्रमा पर किया है, वह उन्होंने जमीन पर किया है। इसरो प्रमुख ने कहा, वह हमारे साथ अंतरिक्ष के प्रचार के लिए भी काम करेंगे। मुझे बहुत खुशी है कि प्रज्ञानंदा भारत को बहुत गौरवशाली और शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए हमारे साथ युवाओं को पाठ्यक्रम में विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विषय लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। सोमनाथ ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि इस समय शतरंज में विश्व में 15वें क्रम के खिलाड़ी प्रज्ञानंदा आने वाले समय में नम्बर एक खिलाड़ी होंगे।
तमिलनाडु में इसरो से संबंधित गतिविधियों पर चर्चा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव एस.सोमनाथ ने सोमवार को मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन से मुलाकात की और इसरो वैज्ञानिकों को सम्मानित करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। राज्य सचिवालय में आयोजित बैठक के दौरान सोमनाथ ने उन्हें भारत के तीसरे चंद्र मिशन, चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान का एक मॉडल प्रस्तुत किया, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सफलतापूर्वक उतरा था। बैठक के दौरान सोमनाथ ने तमिलनाडु में इसरो से संबंधित गतिविधियों पर भी चर्चा की।
दूसरे स्पेसपोर्ट के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण का काम पूरा
तुतुकुडी जिले के कुलसेकरपट्टिनम में इसरो के दूसरे स्पेसपोर्ट के निर्माण पर सोमनाथ ने कहा कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। उन्होंने विभिन्न मंजूरियों और कनेक्टिविटी, बिजली सहित अन्य के लिए भी समर्थन मांगा। दूसरा स्पेसपोर्ट मुख्य रूप से निजी क्षेत्र द्वारा लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) मिशनों के प्रक्षेपण को पूरा करेगा और कुलसेकरपट्टिनम में लगभग दो वर्षों में बनेगा। इस लॉन्च पैड का उपयोग केवल निजी क्षेत्र द्वारा किया जाएगा। वहां से इसरो के कोई रॉकेट लॉन्च नहीं होंगे। एसएसएलवी को पूरी तरह से निजी क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
एसएसएलवी की प्रमुख विशेषताएं
एसएसएलवी प्रक्षेपण यान 500 किलोमीटर की समतल कक्षा में लगभग 500 किलोग्राम के उपग्रहों को लॉन्च करने में सक्षम है। एसएसएलवी की प्रमुख विशेषताएं कम लागत, कम टर्नअराउंड समय, कई उपग्रहों को समायोजित करने में लचीलापन, लॉन्च-ऑन-डिमांड व्यवहार्यता और न्यूनतम लॉन्च बुनियादी ढांचे की आवश्यकताएं हैं।