
kajari teej
चेन्नई. कजरी तीज का पर्व बुधवार को उत्साह के साथ मनाया गया। खासकर हिंदी बाहुल्य इलाकों साहुकारपेट, कोंडितोप, वेपेरी, चूलै, पुरुषवाक्कम, अन्नानगर, एमकेबी नगर, किलपाक, तंडियारपेट, तिरुवत्तियुर, मन्देवेली आदि इलाकों में खासी रौनक रही। कजरी तीज का त्योहार भाद्रपद में कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। कई जगह इसे बूढ़ी तीज या सातूड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। यह त्यौहार राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। कजरी तीज पर महिलाओं ने अपने पति के दीर्घायु होने की कामना के साथ माता पार्वती की स्वरूप नीमड़ी माता की पूजा-अर्चना की। कुंवारी कन्याओं ने अच्छा वर प्राप्त करने के लिए कजरी तीज का व्रत रखा।
कजरी तीज पर नीमड़ी माता का पूजन किया। इन्हें माता पार्वती का ही रूप माना जाता है। महिलाओं ने सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर निर्जल व्रत का संकल्प लिया। नीम की डाल पर चुनरी चढ़ाकर नीमड़ी माता की स्थापना की। सोलह श्रृगांर कर माता का पूजन किया। नीमड़ी माता को हल्दी, मेहंदी, सिंदूर, चूड़िया, लाल चुनरी, सत्तू चढाया। व्रत का पारणा चंद्रमा को अर्घ्य देकर किया।
वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर
महिलाएं पति की लंबी आयु की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार कुंवारी कन्याओं के लिए भी यह व्रत उत्तम माना जाता है। कहते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से कन्याओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही भगवान शंकर की कृपा से वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर हो जाती हैं।
Published on:
25 Aug 2021 10:41 pm
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