चेन्नई. द्रविड राजनीति में चेन्नई के मरीना बीच की बेहद अहम जगह है। यह तमिल राजनीति के तीन प्रतिष्ठित नेताओं का समाधि स्थल है जो कभी न कभी प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। ‘द्रविड़ योद्धा’ कहे जाने वाले डीएमके नेता करुणानिधि की मरीना बीच पर समाधि स्थल है। उनके राजनीतिक गुरू अन्नादुरै के समीप उन्हें दफनाया गया था। सीएन अन्नादुरै डीएमके के संस्थापक थे। उनके जाने के बाद करुणानिधि ही डीएमके के सर्वेसर्वा रहे। करुणानिधि ने कुल 13 बार विधानसभा का चुनाव लड़ा और हर बार जीत दर्ज की। 61 साल के अपने राजनीतिक करियर में वे कभी चुनाव नहीं हारे। 1969 के बाद वे 1971–76, 1989–91, 1996–2001 और 2006–2011 में भी तमिलनाडु के सीएम रहे। वे पहले ऐसे नेता थे, जिनकी बदौलत तमिलनाडु में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी। करुणानिधि तमिल फिल्मों में पटकथा लेखन का काम करत थे। वे समाजवादी और बुद्धिवादी आदर्शों को बढ़ावा देने वाली ऐतिहासिक और सामाजिक (सुधारवादी) कहानियां लिखने के लिए मशहूर थे। उन्होंने अपनी कहानियों में विधवा पुनर्विवाह, अस्पृश्यता का उन्मूलन, ज़मींदारी का उन्मूलन और धार्मिक पाखंड का उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। अपनी कहानियों के जरीए उन्होंने द्रविड़ आंदोलन के समर्थन में भी अपनी विचारधार पेश की। इस तरह करुणानिधि की कहानियां ही उनकी ताकत बनीं और वे लोकप्रिय होते गए। सामाजिक संदेश देने वाली इन पटकथाओं ने ही उन्हें राजनीति में प्रवेश दिलाया और एक बड़े राजनेता के रूप में स्थापित किया।