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करुणानिधि की जिंदगी के दिलचस्प किस्से

एक पाठ से बढ़ाया राजनीति में कदम

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Karunanidhi passed away, Find out Interesting facts of his life

Karunanidhi passed away, Find out Interesting facts of his life

चेन्नई.

तमिल राजनीति का केंद्र रहे डीएमके नेता के निधन के बाद राज्य में शोक की लहर है। करुणानिधि की आत्मकथा और उनको करीब से जानने वाले लोगों से उनके बारे में बहुत दिलचस्प जानकारियां मिली है। करुणानिधि ने महज 14 साल की उम्र में जस्टिस पार्टी ज्वाइन की थी। इसके बाद तमिल राजनीति के शिखर पर पहुंचने तक उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

एक पाठ से बढ़ाया राजनीति में कदम
अपनी आत्मकथा 'नेंजुक्कु नीदिÓ में करुणानिधि ने बताया है कि जस्टिस पार्टी के नेता पनगल राजा के ऊपर एक पाठ पढऩे के बाद उनको राजनीति में आने का खयाल आया। उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि वे महज 14 साल के थे, जब उन्होंने जस्टिस पार्टी ज्वाइन की।

राजनीति के लिए बने लीड एक्टर
अपनी किशोरावस्था में द्रविड़ आंदोलन कर प्रचार करने के लिए उन्होंने छात्रों का ग्रुप बनाया। इसके साथ ही एक विरोधी ग्रुप भी उभरने लगा। विरोधी ग्रुप से मिल रही धमकियों की वजह से करुणानिधि चिंतित थे। विरोधी ग्रुप ने एक प्ले करने का एलान किया। इसके बाद करुणानिधि को लीड रोल प्ले करने को कहा गया। उन्होंने विरोधी ग्रुप को अपने ग्रुप में मिलाने की शर्त रखी, जिस पर वह ग्रुप राजी हो गया। अपनी आत्मकथा में करुणानिधि लिखते हैं कि यह उनके लिए बहुत बड़ा सबक था।

सूरज को बनाया था ध्यान केंद्र
जब अपनी उम्र के 80वें दशक में करुणानिधि ने ध्यान लगाना शुरू किया, तो उन्होंने अपने ध्यान केंद्र के लिए सूरज को चुना। उनको योग सिखाने वाले श्रीधरन ने बताया कि डीएमके प्रमुख का अपनी पार्टी के चुनाव चिह्न को ध्यान के लिए चुनना काफी दिलचस्प था। योग शिक्षक ने कृष्णमचार्या योग मंदिरम के फाउंडर टीकेवी देशिकाचर के साथ करुणानिधि को योग सिखाया था।

सुबह 5 बजे किया मंत्री को फोन
करुणानिधि सुबह पांच बजे जागते थे, इसके बाद वे पार्टी से जुड़ा अखबार पढ़ते थे और कॉफी पीते थे। तमिलनाडु की पहली महिला मंत्रियों में से एक रही सुब्बुलक्ष्मी जगदीशन ने बताया कि एक बार करुणानिधि ने उनको सुबह पांच बजे फोन किया था। उन्होंने पूछा, 'क्या तुमने भ्रूण हत्या पर अखबार में छपा लेख पढ़ा?Ó सुब्बुलक्ष्मी ने बताया कि उन्हें डीएमके प्रमुख के सामने यह बात स्वीकार करनी पड़ी कि वह सोकर भी नहीं उठी थी।

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