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एनकोंडा स्टेंट ग्राफ सिस्टम के जरिए एरोटिक ऑनरिज्म रैप्चर का इलाज

भारत में पहली बार - कावेरी हॉस्पिटल ने किया

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एनकोंडा स्टेंट ग्राफ सिस्टम के जरिए एरोटिक ऑनरिज्म रैप्चर का इलाज

चेन्नई. भारत में पहली बार कॉवेरी अस्पताल ने एडवांस टेक्नोलॉजी वाली एनकोंडा स्टेंट ग्राफ सिस्टम के जरिए सफलता पूर्वक एरोटिक रैप्चर का इलाज किया। आलवारपेट स्थित कॉवेरी अस्पताल में शुक्रवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में इस बात की जानकारी दी गई। अस्पताल के वैस्कुलर सर्जन प्रमुख डॉ. शेखर नटराजन और इंटरवेंशनल कॉर्डियोलाजी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ ए.बी. गोपाल मुरुगन के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम ने आंध्र प्रदेश निवासी प्रभाकरण राव कोंगाला (६९) का एडवांस टेक्नोलॉजी वाली एनकोंडा स्टंट ग्राफ सिस्टम के जरीए सफलता पूर्वक एरोटिक रैप्चर का इलाज किया। शेखर नटराजन ने बताया कि विशेषज्ञों की कमी की वजह से भारत में अब तक एनकोंडा स्टंट ग्राफ सिस्टम के जरिए किसी का इलाज नहीं हो पाया था, लेकिन कॉवेरी अस्पताल की टीम ने यह तकनीक आयात कर प्रक्रिया पूरी करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि न्यूनतम इन्वेसिव कीहोल प्रक्रिया के जरिए मरीज का इलाज हुआ और तीन दिन के बाद ही उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
डॉ गोपाल मुरुगन ने वर्तमान में इस सिस्टम के प्रमुख पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया इस सिस्टम से एरोटिक रैप्चर का इलाज कर कावेरी अस्पताल सबसे अग्रणी हो गया है। अस्पताल के कार्यकारी निदेशक अरविंदन सेल्वराज ने बताया कि रक्तचाप और स्मोकिंग सहित अन्य कई कारणों से एरोटिक रैप्चर जैसी बीमारी होती है। आमतौर पर ऐसी बीमारी ५५ वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ही देखी जाती है।
इस दौरान मरीज प्रभाकरण ने कहा वह इलाज से पूरी तरह से संतुष्ट है और अब उसे पहले जैसी किसी प्रकार की परेशानी नहीं है। प्रभाकरण को पेट में भयानक दर्द की वजह से एनकोंडा स्टेंट ग्राफ सिस्टम के जरिए इलाज का सुझाव दिया गया था। कावेरी अस्पताल में आने से पहले उन्होंने कई अस्पतालों में जांच कराई जहां पर उसे खुली सर्जरी कराने का सुझाव दिया गया था। खुली सर्जरी में मरीज को काफी दिन तक आईसीयू में रखा जाता है और खतरा भी बढ़ जाता है। लेकिन प्रभाकरण का कावेरी अस्पताल में गत २४ अप्रेल को बिना किसी खुली सर्जरी के एरोटिक रैप्चर का सफलता पूर्वक इलाज किया गया। कावेरी अस्पताल की एरोटिक टीम ने मरीज की २४ घंटे निगरानी की और न्यूनतम इन्वेसिव कीहोल प्रक्रिया जिसे एंडोवैस्कुल थैरेपी के नाम से भी जाना जाता है और खुली सर्जरी की प्रक्रिया को भी खत्म कर देती है, के जरिए इलाज हुआ। इतना ही नहीं इस प्रक्रिया के बाद दो दिन में मरीज घर जा सकता है।