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चेन्नई. कोविड-19 महामारी की वजह से लंबे समय तक बाजार बन्द होने के बाद क्षेत्र दोबारा से पटरी पर लौट रहा है। कोविड लॉकडाउन की वजह से वित्तीय वर्ष 2020-21 में निर्यात में 27.72 प्रतिशत की कमी आई थी। मौजूदा वित्तीय वर्ष में अब तक शानदार प्रदर्शन के साथ क्षेत्र का निर्यात सुधर रहा है।
देश का चमड़ा, उसके उत्पादों और जूते-चप्पलों का निर्यात अप्रेल-मई 2021 में पिछले साल की इसी अवधि के 14.679 करोड़ डॉलर से बढ़कर 64.172 करोड़ डॉलर हो गया। देश के चमड़ा और चर्म उत्पाद उद्योग के आने वाले महीनों में यह गति बने रहने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि देश के चमड़ा उद्योग में लगभग 10 लाख व्यक्ति काम करते है। वैश्विक चमड़ा निर्यात और आयात में भारत का हिस्सा लगभग 3 प्रतिशत है। भारतीय चमड़ा और फुटवियर उद्योग बढ़ रहा है और हाल के वर्षों में अमरीका, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और पोलैंड जैसे नए बाजारों में निर्यात की संभावनाएं बढ़ी है।
जूते, सहायक उपकरण व बैग का उत्पादन अधिक
तमिलनाडु में 700 से अधिक मध्यम और छोटे उद्योग काम कर रहे हैं और यह क्षेत्र लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। जिनमें से कम से कम 80 प्रतिशत महिलाएं हैं। प्रमुख चमड़ा उद्योग अंबुर, रानीपेट, वन्नियंबादी, पेरनामबट और चेन्नई क्षेत्र में हैं। जूते, सहायक उपकरण, बैग, चमड़े के वस्त्र का उत्पादन यहां बड़ी संख्या में हो रहा है। गुणवत्ता वाले कच्चे माल, कुशल मजदूरों और उपयुक्त बुनियादी ढांचे की उपलब्धता राज्य के लिए एक अतिरिक्त लाभ है।
भारत से किए निर्यात में तमिलनाडु का योगदान 40 फीसदी
वेलूर जिले में लेदर पार्क से रोजगार को बढ़ावा मिल सकेगा। तमिलनाडु का चमड़े के क्षेत्र में भारत से किए गए निर्यात में कम से कम 40 प्रतिशत का योगदान है और इसमें विकास की काफी संभावनाएं हैं। तमिलनाडु में आने वाले समय में चमड़े के उत्पादों के निर्माण के लिए प्लग-एंड-प्ले मॉडल कारखानों के साथ चार नए क्लस्टर होंगे। इसके लिए काम प्रारम्भिक चरण में है। सरकार ने इसके लिए सहमति दी है। इससे तमिलनाडु में बहुत अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आ सकेगा।
Published on:
20 Jul 2021 11:48 pm
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