
मद्रास दिवस 22 अगस्त को मनाया जाता है। मद्रास से आज की चेन्नई की यात्रा लगभग 385 साल पुरानी है। डिपार्टमेंट ऑफ यूजियम की ओर से अतीत के झरोखे से उन स्मृतियों को एक प्रदर्शनी के रूप में पेश करने का प्रयास किया गया है जहां लोग मद्रास के गौरवशाली इतिहास से अवगत हो सकते हैं। यह प्रदर्शनी एगमोर के गवर्नमेंट यूजियम के एक्जीबिशन हॉल में लगाई गई है जो 29 अगस्त तक रहेगी। चित्र में दर्शित है राज्यपाल का रथ, जिसे गवर्नर का कोच कहा जाता है। यह रथ यहां 1964 में लाया गया था।

पुराने जमाने में कॉफी के बीजों की पिसाई इस मशीन से होती थी। इस मशीन के बारे में जानकारी लेते विजिटर्स।

विश्व युद्ध प्रथम के जर्मन युद्धपोत एसएमएस एमड़न से फेंका गया बारूद का शेल, जो बिना फटे रह गया था।

विदेशी आगंतुक प्रदर्शनी की तस्वीरें देखते। ये तस्वीरें चेन्नई के पुराने दिनों का स्मरण कराती है। इस फोटो में दर्शित मगरमच्छ का मॉडल बताता है कि एक जमाने में कूवम नदी में इस जलीय जीव का विचरण था।