
महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलने का लक्ष्य बनाएं
चेन्नई. श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के तत्वावधान एवं विनोदमुनि व साध्वी मयंकमणिश्री के सान्निध्य में हाल ही साहुकारपेट स्थित स्वाध्याय भवन में मरुधर केशरी मिश्रीमल का ३५वां पुण्य स्मृति दिवस एवं आचार्य हस्तीमल की १०९वीं जन्म जयंती एकासन, संवर व दया दिवस के रूप में मनाई गई। नरेंद्र कांकरिया ने स्वागत भाषण दिया। आनंद चोरडिया, संगीता बोहरा व मधु बैद ने गुणानुवाद किया। पूर्व मंत्री जवाहर कर्णावट व विनोद जैन ने दोनों महापुरुषों की जीवनी पर प्रकाश डाला। युवक परिषद के मांगीलाल चोरडिया ने परिषद की गतिविधियां बताई।
अभिनय मुनि ने कहा गुरु वे होते हैं जो अच्छी समझ ेदेने के साथ ही हमारी शंका का समाधान भी करते हैं और हमें हित-अहित का ज्ञान देते हैं। गुरु पांच प्रकार के होते हैं-अनुग्रह, आवश्यक, लौकिक, आदर्श व आत्मगुरु। इनकी व्याख्या करते हुए कहा गुरु हमेशा शिष्य की उन्नति व विकास चाहते हैं। हमें समझ तो बहुत है लेकिन गुरु की वाणी को झेलने की कला भी आ जाए तो हमारा बेड़ा पार हो जाए। महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलने का लक्ष्य बनाएं। गुरु की शिक्षा से हमारा नवजन्म होता है। साध्वी मयंकमणिश्री ने कहा दोनों महापुरुषों का जन्म जीवन प्रकाश देने वाला था। शरीर रूप से विदा होने के बाद भी प्रकाश देने वाला है क्योंकि उनका जीवन प्रकाशमय था। महापुरुषों के आदर्शो को अपनाएं तो जीवन सफल हो जाए। ऐसा प्रयास करें उनके गुणगान का प्रभाव जीवनभर रहे।
विनोदमुनि ने कहा आचार्य हस्तीमल के रोम-रोम में समता, साधना व सहिष्णुता थी। आज भी हम उनको याद करते हैं क्योंकि इन परोपकारी महापुरुषों ने अपने जीवन का हर पल स्व और पर के कल्याण में व्यतीत किया। सम्यक की प्राप्ति ज्ञान से होती है। इसलिए ज्ञान व क्रिया दोनों पक्ष मजबूत होने चाहिए। जैन धर्म के मौलिक इतिहास के चार भाग आचार्य हस्तीमल की जैन समाज को अनुपम देन है। वे स्वयं ज्ञान व ज्ञान के रसिक भी थे। इस मौके पर दोनों महापुरुषों के जीवन से जुड़ा प्रश्नमंच आयोजित किया गया। अनेक लोगों ने एकासन, आयंबिल, अष्टप्रहर पोषध व उपवास के प्रत्याख्यान किए।
Published on:
23 Jan 2019 05:30 pm
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