
पीएम मोदी ने किया ऐलान: भारत के राइस मैन एमएस स्वामीनाथन को मिलेगा भारत रत्न
चेन्नई.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने वाले एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने भारतीय कृषि को आधुनिक बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। किसानों की फसलों को किस कीमत पर सरकार खरीदेगी, इसको लेकर स्वामीनाथन ने एक फॉर्मूला दिया था। उसके आधार पर ही किसानों की मदद की जा रही है। पीएम मोदी ने ये जानकारी ट्वीट कर साझा की। उन्होंने इसका ऐलान करते हुए एक्स पर पोस्ट में लिखा ‘यह बेहद खुशी की बात है कि भारत सरकार कृषि और किसानों के कल्याण में हमारे देश में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. एमएस स्वामीनाथन जी को भारत रत्न से सम्मानित कर रही है।
पीएम मेदी ने अपने पोस्ट में आगे लिखा ‘उन्होंने चुनौतीपूर्ण समय के दौरान भारत को कृषि में आत्मनिर्भरता हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में उत्कृष्ट प्रयास किए। हम एक अन्वेषक और संरक्षक के रूप में और कई छात्रों के बीच सीखने और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने वाले उनके अमूल्य काम को भी पहचानते हैं। डॉ. स्वामीनाथन के दूरदर्शी नेतृत्व ने न केवल भारतीय कृषि को बदल दिया है बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और समृद्धि भी सुनिश्चित की है। वह ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें मैं करीब से जानता था और मैं हमेशा उनकी अंतर्दृष्टि और काम को महत्व देता था।
कृषि के क्षेत्र में लाई थी क्रांति
एमएस स्वामीनाथन भारतीय कृषि वैज्ञानिक थे जिनका जन्म 7 अगस्त, 1925 को हुआ था। कृषि विज्ञान के क्षेत्र में इनके काम ने खेती में क्रांति ला दी। इनके कार्यो ने भारत में खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता लाई थी। स्वामीनाथन महात्मा गांधी की मान्यताओं और भारत के स्वतंत्रता संग्राम से काफी प्रभावित थे। उनका जन्म भारत के तमिलनाडु के कुंभकोणम में हुआ था। स्वामीनाथन की जिंदगी में 1942-1943 के बंगाल अकाल के समय से टर्निंग प्वाइंट आया जिसके बाद अपने पूरे जीवन को भारत के कृषि उद्योग को बढ़ाने की ओर लगाने का निर्णय किया।
हरित क्रांति के जनक
स्वामीनाथन को देश में गेहूं और चावल की उच्च उपज देने वाली किस्मों को पेश करने और इस खेती को विकसित करने में उनके नेतृत्व और सफलता के लिए "भारत में हरित क्रांति के जनक" के रूप में जाना जाता है। भारत में कृषि में अधिक उपज वाली गेहूं और चावल की किस्मो, गेहूं की किस्मों को विकसित करने में कार्य से स्वामीनाथन ने क्रांति लाई थी। इससे भारत खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया और अकाल का खतरा टल गया। स्वामीनाथन ने कृषक वर्गों के कल्याण के लिए कृषि उपज के लिए उचित मूल्य और धारणा तय करने में भी अमिट योगदान दिया है।
कृषि और जेनेटिक्स के क्षेत्र में स्वामीनाथन की यात्रा 1943 के बंगाल अकाल के दौरान एक निर्णायक क्षण से शुरू हुई थी। चावल की भारी कमी और इसके परिणामस्वरूप लाखों लोगों की जान जाने से युवा स्वामीनाथन बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने कृषि अनुसंधान का कार्यभार संभालने को लेकर शुरुआत की। उनकी व्यक्तिगत प्रेरणा ने उन्हें मद्रास कृषि महाविद्यालय और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान सहित प्रसिद्ध संस्थानों में अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। स्वामीनाथन ने खुद को गेहूं और चावल की उच्च उपज देने वाली किस्मों को विकसित करने के लिए समर्पित कर दिया जो भारत की विविध कृषि स्थितियों का सामना कर सकें। उनके अभूतपूर्व कार्य ने हरित क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया. उनके इस कार्य ने कृषि मेथड का चेहरा हमेशा के लिए बदल दिया। उनके नेतृत्व और समर्पण के माध्यम से भारत गेहूं और चावल उत्पादन में आत्मनिर्भर बन गया, जिससे लाखों लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
कई पुरस्कार मिल चुके है
उनके लिए भारत रत्न की घोषणा होने से पहले उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। कृषि में उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार और सराहना मिली। उन्हें साल 1987 में प्रथम विश्व खाद्य पुरस्कार विजेता चुना गया। इसके बाद पद्म श्री (1967), पद्म भूषण (1972) और पद्म विभूषण (1989) से भी सम्मानित किया गया. रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (1971) और अल्बर्ट आइंस्टीन विश्व विज्ञान पुरस्कार (1986) सहित कई तरह के अंतर्राष्ट्रीय सम्मान दिया गया है।
Published on:
09 Feb 2024 03:57 pm
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