
ग्राम्य जीवन के ‘सोशल इंडेक्स’ को मजबूत कर रहा NABARD
चेन्नई. राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) तमिलनाडु सहित देशभर के ग्राम्य जीवन के ’सोशल इंडेक्स’ के सतत विकास को लेकर कार्य कर रहा है। महिलाएं और किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें। ग्रामीण इलाकों में सामाजिक और पूंजीगत संरचना का विकास हो। स्वास्थ्य और शिक्षण सेवाओं से सामाजिक बुराई का अंत हो। कुछ ऐसे ही उद्देश्यों को नाबार्ड अपनी स्थापना से अब तक अपने कार्य व्यवहार से पूरा करता आया है। तमिलनाडु में नाबार्ड वित्त पोषित परियोजनाओं से आए सामाजिक बदलाव के भरपूर दृष्टांत भरे पड़े हैं। अन्य गतिविधियों के साथ - साथ नाबार्ड का वर्तमान में फोकस किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को और भी समृद्ध करने में है। राजस्थान पत्रिका ने नाबार्ड तमिलनाडु और पुदुचेरी के मुख्य महाप्रबंधक आर. शंकर नारायण से बैंक की कार्यप्रणाली को लेकर विस्तार से वार्ता की।
जमीन से जुड़ा एक अग्रणी बैंक
मुख्य महाप्रबंधक आर शंकर नारायण बताते हैं कि नाबार्ड जमीन से जुड़ा हुआ एक अग्रणी बैंक है। इसके अध्ययन से लेकर नीतियों तक में आम लोगों का पूरी तरह से समावेश रहता है। फिर चाहे वो आधार स्तर के फार्मर्स क्लब हो अथवा वाटरशेड डेवलपमेंट की बात। बुनियादी संरचना का विकास हो अथवा कृषि साख का विस्तार। नाबार्ड 400 से अधिक जिला विकास प्रबंधक के साथ देश और स्वयं तमिलनाडु राज्य अपने राज्य में दो से तीन जिलों पर क्लस्टर ऑफिस के जरिए बैंक जमीनी स्तर पर विकास को लेकर होने वाली चर्चाओं के आधार पर योजनाओं को अंतिम रूप देने तक में अपनी जरूरी भूमिका निभाता है।
नाबार्ड पर्याय है सामाजिक बदलाव का
उन्होंने बताया कि 1982 में बैंक की स्थापना हुई तब से लेकर अब तक बैंक किसानों के समूहीकरण, उन्मुखीकरण और आर्थिक विकास में लगा हुआ है। ग्रामीण इलाकों के जलस्रोतों का विकास, पेयजल की व्यवस्था, सड़क, स्कूल, प्राथमिक उपचार सेवाएं आदि जैसी पूंजीगत व्यय की योजनाओं में बैंक का अपना अप्रतिम योगदान रहता है। महिला स्व-सहायता समूहों के जरिए उनकी आर्थिक मजबूती और अब किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से उनको आत्मनिर्भर बनाने की पहल हो रही है। एसएचजी बैंक लिंकेज प्रोग्राम विकास की वह धुरी है जिसके जरिए महिलाओं में बचत, साहस, नेतृत्व क्षमता समेत सभी सामाजिक पहलुओं का अनवरत रूप से विकास हुआ। साक्षरता से उनकी आय बढ़ी, स्वास्थ्य बेहतर हुआ और अब उन्होंने सामाजिक बुराइयों से लड़ने का पूरी तरह से बीड़ा उठा लिया।
4500 साख समितियों का कंम्प्यूटरीकरण :
किसानों तक नई प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण की नीति के तहत केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त कार्यक्रम के तहत साढ़े चार हजार प्राथमिक कृषि साख समितियों का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है। संभावना है कि दिसम्बर महीने तक सभी समितियां हाईटैक हो जाएंगी। इनको नए कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराए जाएंगे। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के निर्देश पर हो रहे इस कार्य में नाबार्ड को तमिलनाडु सरकार से भी पूरा सहयोग मिल रहा है और कार्य भी बहुत तेजी से चल रहा है।
तमिलनाडु के लिए नाबार्ड की योजनाएं
- अगले वर्ष के लिए 8.34 लाख करोड़ की वार्षिक साख योजना (पॉटेन्शियल लिंक क्रेडिट प्लान) जबकि चालू वित्त वर्ष की योजना 4.93 लाख करोड़ की है।
- ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (आरआइडीएफ) के जरिए बैंक ने 2022-23 में 2277 करोड़ रुपए और चालू वित्त वर्ष में अब तक 1475 करोड़ रुपए जारी किए हैं
- केंद्र सरकार के निर्देश के तहत 125 किसान उत्पादक संगठनों समेत कुल 474 एफपीओ को 44.12 करोड़ रुपए का ऋण संवितरण किया गया और इससे 2.66 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं
Published on:
22 Nov 2023 02:09 pm
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