
जाप और पाप साथ-साथ नहीं चल सकते!
चेन्नई. मद्रास विश्वविद्यालय के जैनविद्या विभाग में संस्कृत भाषा के भक्तामर स्तोत्र पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विद्वत्संगोष्ठी का हाल ही समापन हुआ। शंकरलाल सुन्दरबाई शासुन जैन महिला महाविद्यालय और रिसर्च फाउंडेशन फॉर जैनोलॉजी (आरएफजे) के सहयोग से शासुन जैन महाविद्यालय, टी. नगर में आयोजित संगोष्ठी के दूसरे दिन मुख्य अतिथि मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश डॉ. विनीत कोठारी थे।
उन्होंने कहा नैतिकता के दूत बनकर भक्तामर से प्राप्त अमृत की बूंदें जन-जन तक वितरित करें। अध्यक्षता करते हुए शासुन जैन कॉलेज के सचिव एस. अभयकुमार श्रीश्रीमाल ने कहा महाविद्यालय परिसर में देशभर के विद्वानों के बीच पवित्र भक्तामर स्तोत्र की चर्चा सौभाग्य की बात है। आरएफजे के महासचिव डॉ. कृष्णचंद चोरडिय़ा ने कहा भक्तामर में श्रद्धा व संकल्प का चमत्कार है।
समापन व्याख्यान में अंतरराष्ट्रीय प्राकृत अध्ययन व शोध केन्द्र के निदेशक डॉ. दिलीप धींग ने कहा शब्द-जगत छोटा लेकिन अर्थ-जगत उससे बड़ा होता है और भाव जगत असीम-अनंत होता है। भक्ति और काव्य का सम्बन्ध भाव-जगत से होता है। उन्होंने कहा परमात्मा की स्तुति से जीवन में बदलाव आना चाहिये। जाप और पाप साथ-साथ नहीं चल सकते। बतौर सम्मानित अतिथि तमिलनाडु राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य वीडीएस. डी. गौतमकुमार ने कहा भक्तामर के नित्य पाठ से दु:ख मिटते और सुख मिलते हैं।
शासुन जैन महाविद्यालय में जैनविद्या विभाग के निदेशक डॉ. ज्ञान जैन की अध्यक्षता में चौथा सत्र हुआ, जिसमें साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग ने 'अभय की साधना का स्तोत्र भक्तामरÓ विषयक अपने शोधपत्र में कहा आचार्य मानतुंग लोकमन के पारखी थे। छठे सत्र की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा जिनेन्द्र-भक्ति को प्रथम स्थान पर रखकर गुरुवाद और पंथवाद का दुष्प्रभाव दूर किया जा सकता है। अंतिम सत्र की अध्यक्षता वाराणसी के डॉ. मारुतिनंदन प्रसाद तिवारी ने की। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियदर्शना जैन ने बताया कि दो दिवसीय संगोष्ठी में 39 विद्वानों और शोधार्थियों ने हिन्दी, तमिल और अंग्रेजी में शोधपत्र प्रस्तुत किए।
उन्होंने बताया कि मद्रास विश्वविद्यालय में साध्वी सिद्धिसुधा की निश्रा एवं पूर्व कुलसचिव डॉ. डी. अमरचंद के आतिथ्य में तमिलनाडु दुग्ध उत्पाद विकास आयुक्त डॉ. एम. वल्ललार ने संगोष्ठी का उद्घाटन किया। अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुल-सचिव डॉ. आर. श्रीनिवासन ने की। मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़ के डॉ. जयंतीलाल जैन मुख्य वक्ता थे। आरएफजे के साथ विभाग से प्रकाशित एवं डॉ. प्रियदर्शना द्वारा संपादित पुस्तक 'इसेंस ऑफ प्रवचनसारÓ का विमोचन हुआ। राजल बोरुंदिया और शांति चोरडिय़ा ने संचालन एवं सुनिता जैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
Published on:
11 Jan 2020 06:18 pm
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