
महिला काव्य मंच की गोष्ठी में बिखरे सब रंग
चेन्नई.
महिला काव्य मंच (पंजी.) तमिलनाडु इकाई का ऑनलाइन कवि सम्मेलन चेन्नई में आयोजित किया गया जो राष्ट्रीय सचिव (दक्षिण प्रांत) डॉ. मंजु रुस्तगी, अध्यक्षा- सरला विजय सिंह, उपाध्यक्ष-रेखा राय एवं सचिव- डॉ.सरोज सिंह के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन सरिता सरगम ने किया एवं लगभग 25 कवि-कवयित्रियों ने काव्य पाठ कर समा बांध दिया। हर विधा, सब रंग इस काव्य गोष्ठी में सुनने को मिले। रेखा सुमन की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का आगाज़ हुआ। तत्पश्चात डॉ.विद्या शर्मा ने पापा कविता सुना कर सब को भावविभोर कर दिया -तुम मेरे आकाश हो पापा तुम में मेरा ब्रह्मांड समाया। डॉ. निर्मला एस.मौर्य ने बिटिया और औदुंबर कविता के द्वारा बेटी की महत्ता सुना कर भावुक कर दिया-रोंपती है मन में रिश्तों के पौधे, बिटिया प्रतीक है नवीन चेतना का। सरला सिंह ने गीत कुछ इस तरह गुनगुनाने लगे, नींद से अब वो जगाने लगे हैं गजल की खूबसूरत प्रस्तुति दी। डॉ. रविता भाटिया ने-जो फुर्सत का वक्त मिला है, रो कर क्यों गुजारे हम कविता सुनाकर जीवन में उत्साह और प्रेरणा को प्रवाहित किया। डॉ.सुजाता गुप्ता ने उठो न मां सुनाकर आज की समसामयिक स्थिति का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया-मेरे हिस्से की रोटी भी तेरे आंचल में धरी है। रेखा चौहान ने नारी जीवन को संपूर्ण रूप से समेट कर अपनी कविता में प्रस्तुत किया-नारी को कितने किरदार निभाने पड़ते हैं, डॉ. डॉली की कविता मां पर आधारित थी-मां धरती होती है, जननी होती है मां, अनिल मोदी ने अपनी कविता महावीर प्रभु को समर्पित की-हे मेरे पारस प्रभु, शोभा चोरडिया ने लॉकडाउन में पीहर ना जाने के दुख में पूरा पीहर ही कविता में उतार कर रख दिया-पीहर की ऊष्मा से हम खुद को ताजा कर आते हैं, डॉ.वासुदेवन ने आशादीप कविता से मन में आशा का संचार किया-आशा एक उम्मीद, एक चाह, राजी जी की प्रेम कविता कुछ तो चाहत होगी- रिश्ता खुद-ब-खुद नहीं बनते, उन्हें बनाना पड़ता है और किरण जी की कविता जीवन दर्शन पर आधारित मिट्टी का शरीर-शरीर क्या है, महज मिट्टी है एक अलग ही दुनिया में ले गई। रोचिका शर्मा ने जीवन के सुखद पहलू पर अपनी कविता प्रस्तुत की-खिलेंगे प्यार और चाहत भरे फूल आंगन में, विजय सिंह ने एक गजल सुना कर वातावरण को सुरमय कर दिया-तू चाहे तो बदल सकता है, तूफानों के रुख, नीलावती मेघाणी ने जूते वाला कविता में जूते वाले के दर्द की भावपूर्ण अभिव्यक्ति दी-सड़क के किनारे बैठता, सबके पैरों को ताकता। डॉ.हर्षलता शाह ने एक मजदूर का दर्द कविता के माध्यम से मजदूरों का दर्द बयां किया-रास्तों की चाल में कभी बस, ट्रेन के नीचे आता रहा, रेखा सुमन की अहसास कविता में संस्कृति की झलक मिली-पुरखों ने हमें समझाया, मगर समझा कब, कौन कहां, जीवन के विविध पक्षों को उद्घाटित किया। ओमपाल शर्मा ने एक गजल सुना कर-गुनगुना कर जी रहे हैं, जिंदगी अपनी गजल है, ईश्वर करुण ने एक दर्द भरी गजल प्रस्तुत की-खुद लिखा, खुद को सुनाया हमने, खत मुहब्बत का छुपाया हमने, डॉ. सरोज सिंह ने मां को समर्पित एक सुंदर प्रस्तुति दी- निश्छलता की मूरत है तू, प्राणों से भी प्यारी है, डॉ.मंजु रुस्तगी ने नए परिवेश में ढलती औरत का चित्रण अपनी कविता के माध्यम से किया-औरतें अब बोलने लगी हैं, परंपरा की गिरहें खोलने लगी हैं, रेखा राय ने भक्ति भावपूर्ण रचना की प्रस्तुति दी-ईश्वर की कारीगरी के माध्यम से-सारे जग को रचा है तूने। सरिता सरगम की कविता देशभक्ति से लबरेज रही-बह जाए खून का कतरा-कतरा, मां भारती के आंचल में समा जाऊंगा। डॉ.सरोज सिंह के धन्यवाद ज्ञापन से इस काव्य गोष्ठी का समापन हुआ।
Published on:
03 Jun 2020 10:15 pm
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