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बेंगलुरु से आए कवि प्रतीक भारत पलोड़ ने श्रोताओँ को किया मंत्रमुग्ध

कोला सरस्वती स्कूल के प्रांगण में बेंगलुरु से पधारे मुख्य अतिथि प्रतीक भारत पलोड़' दर्पण' ने अपनी विविध कविताओं की प्रस्तुति कर हाॅल में हर श्रोता का मन जीत लिया

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बेंगलुरु से आए कवि प्रतीक भारत पलोड़ ने श्रोताओँ को  किया मंत्रमुग्ध

बेंगलुरु से आए कवि प्रतीक भारत पलोड़ ने श्रोताओँ को किया मंत्रमुग्ध


चेन्नई. अनुभूति साहित्यिक संस्था की सितंबर मासिक कवि गोष्ठी में बेंगलुरु से आए कवि प्रतीक भारत पलोड़ दर्पण ने अपनी विविध कविताओं की प्रस्तुति से हॉल को मंत्रमुग्ध कर दिया। कोला सरस्वती स्कूल के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में पलोड़ ने राम मंदिर, बाल कविता, प्रेम रस और भक्ति रस से भरी अपनी कविताओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

अपनी राम मंदिर पर रची कविता में पलोड़ ने प्रभु श्री राम को आह्वान किया। उनकी बाल कविता में चील, भालू और खरगोश के माध्यम से कानन का आनंद आया। प्रेम रस में भीगी उनकी कविता को श्रृंगार रस में भिगोकर उन्होंने रिश्तों को संभालने के लिए जरूरी शब्द संयोजन प्रस्तुत किए। उनकी मारवाड़ी में रची अनोखी रचना ने श्रोताओं को गदगद कर दिया।

कार्यक्रम में अनुभूति के अन्य कवियों ने भी अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं। दिलीप चंचल, अशोक मिमानी, डॉक्टर के के कांकानी, राजेश शर्मा, महेश नक्श, शकुंतला करनानी और सरिता सरगम ने अपनी कविताओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस गोष्ठी में एक प्रयोग भी किया गया, जिसमें लघु कथाकारों को उनके कथा पाठ के लिए आमंत्रित किया गया। डॉ.मनोज सिंह और शोभा चोराडिया ने अपनी लघु कथाओं का पाठ किया।

काव्य गोष्ठी का संचालन एम जी बोहरा ने किया। मुख्य अतिथि का के के महेश्वरी द्वारा शॉल पहना कर और गोविंद मूंदड़ा द्वारा स्मृति चंद्र प्रदान कर स्वागत किया गया। महासचिव नीलम सारडा ने आने वाले हिंदी दिवस पर अनुभूति और कोला सरस्वती स्कूल के सह सौजन्य और राजस्थान पत्रिका के मीडिया पार्टनर के सहयोग से होने वाली अंतर्विद्यालयीन प्रतियोगिताओं की जानकारी सदन के समक्ष रखी। अंत में धन्यवाद ज्ञापन शकुंतला करनानी के द्वारा दिया गया।