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शिक्षा से पहले संस्कार और व्यापार से पहले व्यवहार बहुत जरूरी

ताम्बरम जैन स्थानक में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने कहा परमात्मा के गुणों का अनुसरण कर जीवन पथ पर आगे बढना चाहिए।

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शिक्षा से पहले संस्कार और व्यापार से पहले व्यवहार बहुत जरूरी

चेन्नई. ताम्बरम जैन स्थानक में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने कहा परमात्मा के गुणों का अनुसरण कर जीवन पथ पर आगे बढना चाहिए। मनुष्य को शिक्षा से पहले अच्छे संस्कार प्राप्त करना चाहिए। मनुष्य लाख शिक्षित हो जाए अगर उसके संस्कार अच्छे नहीं हैं तो शिक्षित होना व्यर्थ हो जाएगा। बिना संस्कारों वाली शिक्षा जीवन को आगे नहीं बढ़ा सकती। इसलिए शिक्षा से पहले संस्कार और व्यापार से पहले व्यवहार सीखना बहुत जरूरी है। इसी प्रकार परमात्मा को पहचानने से पहले माता-पिता को पहचानना जरूरी है। जो अपने माता पिता को नहीं पहचान सकता वह परमात्मा को भी नहीं पहचान पाएगा। उन्होंने कहा कोई भी अच्छी शुरुआत घर से होनी चाहिए।
सागरमुनि ने कहा कि श्रवण करने से ही मनुष्य का आत्म ज्ञान बढ़ता है। पांच इन्द्रियों में से सबसे महत्वपूर्ण कान होता है। जिससे मनुष्य अच्छी और बुरी दोनों तरह की बातों को सुन सकता है। यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह किस बात को ज्यादा महत्व दे।
इससे पहले सोलापुर संघ से सुभाष लुणावत के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल पहुंचा। धन्यकुमार खाबिया ने संघ की तरफ से मुनिवृन्द का अगला चातुर्मास महाराष्ट्र के सोलापुर में करने की विनती रखी। इस पर विनयमुनि ने सोलापुर संघ को आश्वासन दिया। लेकिन कहा कि पूरी स्वीकृति होली चातुर्मास पर होगी।