
Rajasthan Diwas 2023
चेन्नई. राजस्थान का गौरवशाली इतिहास रहा है और समृद्ध संस्कृति। राजस्थान की मेहमाननवाजी और अपणायत का हर कोई कायल है। हर विपदा के समय राजस्थान के लोग सदैव अग्रिम पंक्ति में नजर आते हैं। सर्वधर्म समभाव की मिसाल राजस्थान में देखने को मिलती है। अपनी वीरता व दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ ही अनूठी संस्कृति के लिए भी राजस्थान को जाना जाता है। हर साल 30 मार्च को राजस्थान दिवस मनाया जाता है। राजस्थान दिवस के मौके पर यहां चेन्नई में राजस्थान पत्रिका की मेजबानी में आयोजित पत्रिका टॉक-शो में राजस्थान मूल के लोगों ने खुलकर अपने विचार रखे। पत्रिका टॉक शो में राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु के पूर्व अध्यक्ष कांतिलाल संघवी KANTILAL SANGHVI, राजस्थानी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश मालपानी CHANDRA PRAKASH MALPANI, राजपुरोहित ट्रस्ट चेन्नई के अध्यक्ष रमेश कुमार मादा RAMESH KUMAR MADA, राजस्थान राजपूत परिषद के पूर्व अध्यक्ष चंदनसिंह बालावत CHANDAN SINGH BALAWAT, श्री मारू लोहार समाज तमिलनाडु के अध्यक्ष जीतू लोहार JEETU LOHAR एवं जालोर जिला परिषद सदस्य चेन्नई प्रवासी गोपाल चौधरी GOPAL CHOUDHARY ने भाग लिया। राजस्थान पत्रिका चेन्नई के डिप्टी न्यूज एडिटर DEPUTY NEWS EDITOR अशोक सिंह राजपुरोहित ASHOK SINGH RAJPUROHIT ने पत्रिका टॉक शो का संचालन एवं संयोजन किया। पेश हैं राजस्थान दिवस पर विशेष रिपोर्टः
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उद्यमिता से राजस्थानी देश की प्रगति में अहम सहभागी
राजस्थान का अपना अलग इतिहास रहा है। तमिलनाडु में राजस्थानी एसोसिएशन एक बड़ा संगठन हैं जिसमें राजस्थान मूल के लोग जुड़े हैं। कोरोना काल का समय सभी के लिए काफी विपदा का रहा। कई तरह की चुनौतियां सामने आई। बिजनस पर भी असर पड़ा। इस काल-अवधि में राजस्थानियों ने दिल खोलकर लोगों की मदद की। अपनी उद्यमिता से राजस्थानी देश की प्रगति में अहम सहभागी बने हैं। भारत को विकसित बनाने की दिशा में राजस्थान के लोगों का सक्रिय और सराहनीय योगदान रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य में भी राजस्थान अद्वितीय है। यहां के पर्यटन स्थल, वन्यजीव अभयारण्य, अद्भुत स्थापत्य कला वाले किले और हवेलियां तथा थार का रेगिस्तान दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करता हैं।
- कांतिलाल संघवी, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु।
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अपनी परम्परा एवं रीति-रिवातों को बनाए रखने में लगातार प्रयासरत
राजस्थान के विकास में प्रवासियों का योगदान सराहनीय रहा है। वे अपनी जड़ों से भी जुड़े हुए हैं। अपनी परम्परा एवं रीति-रिवातों को बनाए रखने की दिशा में भी लगातार प्रयासरत है। शौर्य और साहस ही नहीं बल्कि हमारी धरती के सपूतों ने हर क्षेत्र में कमाल दिखाकर देश-दुनिया में राजस्थान के नाम को ऊंचा किया हैं। यहां की कला संस्कृति तथा व्यापार इनकी अनूठी विशेषताएं हैं। राजस्थान की धरती पर रणबांकुरों ने जन्म लिया है। यहां वीरांगनाओं ने भी अपने त्याग और बलिदान से मातृभूमि को सींचा है। इसे पहले राजपूताना के नाम से जाना जाता था तथा कुल 19 रियासतों को मिलाकर यह राज्य बना तथा इसका नाम राजस्थान किया गया।
- चन्द्रप्रकाश मालपानी, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु।
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अतिथि सत्कार राजस्थान की खास पहचान
खासकर नई पीढ़ी मारवाड़ी या राजस्थानी भाषा को भूल रही है। ऐसे में नई पौध को इससे जोड़ने के प्रयास किए जाने की जरूरत है। तमिलनाडु में भी राजस्थान मूल के लोगों के कई एसोसिएशन बने हुए हैं। समाज स्तर पर भी कई संगठन है। ऐसे में इन संगठनों के माध्यम से कला व संस्कृति को आगे ले जाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास हालांकि सराहनीय है लेकिन इसे और विकसित किए जाने की जरूरत है। अतिथि सत्कार राजस्थान की खास पहचान रही है। राजस्थान के लोगों के बारे में अक्सर यह कहावत सुनी जाती है कि वे मेहनती व ईमानदार होते हैं। यही गुण उनके लिए यहां बिजनस में भी मददगार साबित हो रहा है।
- रमेश कुमार मादा, अध्यक्ष, राजपुरोहित ट्रस्ट चेन्नई।
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राजस्थान जिसे वीरो की भूमि कहा जाता है
बात यदि पहनावे की की जाएं तो राजस्थानी लोगों का एक अलग पहनावा रहा है। हालांकि यह अलग बात है कि पाश्चात्य सभ्यता के चलते हमारा परम्परागत पहनावा पीछे छूटता जा रहा है। अब केवल शादी-ब्याह, तीज-त्यौहार या अवसर विशेष तक सीमित रह गया। ऐसे में आने वाले वक्त में केवल इतिहास में ही पढ़ने सुनने को मिले तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। राजस्थान जिसे वीरो की भूमि कहा जाता है। राजस्थान में ऐसे-ऐसे वीरों ने जन्म लिया है जिनके बारे में जितना कहा जाए उतना कम है। एक तरफ यहां पर चित्तौड़गढ़ में राजपूत शासक महाराणा प्रताप पैदा हुए थे तो वहीं दूसरी तरफ अजमेर में चौहान वंश के प्रतापी राजा पृथ्वीराज चौहान भी पैदा हुए थे। इसके अलावा बप्पा रावल, महाराणा सांगा, मीराबाई, ठाकुर कुशाल सिंह जैसे बलिदानी लोग भी यहां पर पैदा हुए।
- चंदनसिंह बालावत, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान राजपूत परिषद चेन्नई।
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स्थानीय लोगों के सात मिश्री की तरह घुल-मिल जाते हैं
हमारे पर्व-त्यौहार की रौनक थी वह छिनती जा रही है। या यों कहें कि कम होती जा रही है। बात चाहे होली-दिवाली की हो या अन्य पर्व की। पहले जैसी बातें अब कम दिखती है। कई त्यौहार तो अब केवल रस्म अदायगी भर रह गए हैं। राजस्थान के लोगों के बारे में ऐसा भी अक्सर कहा जाता है कि राजस्थान के लोग जहां भी जाते हैं वे वहां के स्थानीय लोगों के सात मिश्री की तरह घुल-मिल जाते हैं। यह गुण राजस्थानियों में कूट-कूट कर भरा है। यहां सभी धर्मों और संप्रदायों के लोग आपस में मिलजुल कर रहते हैं और एक-दूसरे के त्योहारों को साथ-साथ मनाते हैं।
- जीतू लोहार, अध्यक्ष, श्री मारू लोहार समाज तमिलनाडु।
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दोनों प्रदेशों के बीच तालमेल बिठाते हुए बिजनस को आगे बढ़ा रहे
कई किसान कौमें आज देशभर में बिजनस में आगे बढ़ रही है। बल्कि वे अपनी मेहनत के बूते बिजनस में अधिक सफलता भी हासिल कर रही है। हमारे मंदिर एवं धार्मिक स्थलों का भी हमारे लिए एकता, सद्भावना, भाईचारे की भावना में बहुत योगदान रहा है। राजस्थान हमारी जन्मभूमि है तथा तमिलनाडु हमारी कर्मभूमि। राजस्थानी दोनों प्रदेशों के बीच तालमेल बिठाते हुए बिजनस को आगे बढ़ा रहे हैं। बिजनस के लिहाज से यहां का शांत माहौल भी उनके लिए काफी मददगार बन रहा है। शिक्षा, चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान के लिए राजस्थानी लगातार आगे रहते हैं।
- गोपाल चौधरी, जिला परिषद सदस्य जालोर, चेन्नई प्रवासी।
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Published on:
30 Mar 2023 09:44 pm
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