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करुमनचावड़ी कुलम जलाशय का जीर्णोद्धार

भारतीय उद्योग संघ (सीआईआई) दक्षिणी क्षेत्र (एसआर) ने तमिलनाडु सरकार के सहयोग से चेन्नई, कांचीपुरम एवं तिरुवल्लुर जिलों के 34 जल निकायों के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया है। अपने सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के प्रयास के तहत ग्रेटर चेन्नई कार्पोरेशन, जीएमएमसीओ लिमिटेड एवं सीआईआई एसआर के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में करुमनचावड़ी कुलम जल निकाय का उद्घाटन किया गया। बुधवार को सीआईआई ने इस जल निकाय को समुदाय को सौंप दिया। इस दौरान वहां

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Renovation of Karimnavacharya Kulam Reservoir

Renovation of Karimnavacharya Kulam Reservoir

चेन्नई।भारतीय उद्योग संघ (सीआईआई) दक्षिणी क्षेत्र (एसआर) ने तमिलनाडु सरकार के सहयोग से चेन्नई, कांचीपुरम एवं तिरुवल्लुर जिलों के 34 जल निकायों के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया है। अपने सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के प्रयास के तहत ग्रेटर चेन्नई कार्पोरेशन, जीएमएमसीओ लिमिटेड एवं सीआईआई एसआर के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में करुमनचावड़ी कुलम जल निकाय का उद्घाटन किया गया। बुधवार को सीआईआई ने इस जल निकाय को समुदाय को सौंप दिया। इस दौरान वहां ग्रेटर चेन्नई कार्पोरेशन के भास्करन, सीआईआई के एच. जयराम समेत विभिन्न संस्थाओं एवं संगठनों के वरष्ठि अधिकारी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि ओएमआर में स्थित यह जलाशय आस-पास के लोगों के संबंधी समस्याओं का निराकरण करता है। इस जलाशय के जीर्णोद्धार में इसकी सफाई समेत वार्डों का निर्माण एवं इन पर पौधे लगाने का काम भी शामिल था।

श्रद्धावान ही है ज्ञान प्राप्त करने का अधिकारी

श्री एएमकेएम जैन मेमोरियल, पुरुषावाक्कम में विराजित उपाध्याय प्रवीणऋषि ने कहा कि अनुत्तर निर्वाण कल्याणक की देशना तीर्थंकर परमात्मा का दिया हुआ वरदान है। सभी वरदानों को प्राप्त करने का पहला वरदान है विनय।

अनादिकाल के अपने अन्तर के अविनय के मिथ्यात्व से मुक्त होकर प्रभु के चरणों में भाव बनाएं कि अविनय के अंधेरे में हमने बहुत ठोकरें खाई है, हमें आपसे विनय का उजाला मिलेे। इस गहरी भावना के साथ परमात्मा के दिए हुए वरदानों का गान करते हुए श्रुतदेव की आराधना करें।

परमात्मा ने कहा है कि ज्ञान, दर्शन, चरित्र की कम से कम आराधना भी यदि कोई करे तो सात-आठ भव में मोक्ष में जाएगा। मरीची के भव में परमात्मा के पास ज्ञान, दर्शन, चरित्र सभी था लेकिन आराधना का भाव नहीं था इसलिए उसी भव में मोक्ष प्राप्त नहीं हो सका, इसलिए आराधना को परमात्मा ने सबसे बड़ा कहा है।

हमें अपने धर्मग्रंथों और आगम की पूरी जानकारी और बोध होना चाहिए। आगम और धर्मग्रंथों की आराधना में कोई निश्चित समय और स्थिति नहीं होनी चाहिए, कोई बंधन नहीं होना चाहिए। अपने धर्मगं्रथों का स्वाध्याय करने की अनिवार्यता होनी चाहिए।

उत्तराध्ययन अनुत्तर ग्रंथ में परमात्मा ने अपने अंतिम समय में एक पिता ही तरह संतान को दिया जाने वाला अपने संपूर्ण जीवन के ज्ञान का निचोड़ प्रदान किया है। आराधना भक्ति पूर्वक की जाती है और स्वाध्याय बुद्धिपूर्वक। बच्चे को मां के पास पढऩे के लिए कोई नियम, बंधन नहीं होतें, वहां दिल का मामला होता है। इसी आधार पर श्रुतदेव आराधना की परंपरा शुरू की गई है।

स्वाध्याय में तो सीमित अर्थ मिलता है लेकिन आराधना में एक अलग ही आनन्द, अर्थ और दिलों में उजाला प्राप्त होता है।

परमात्मा ने उत्तराध्ययन सूत्र में कहा है कि ज्ञान श्रद्धावान को ही ज्ञान मिलता है बुद्धिमान को नहीं। श्रुतदेव की आराधना इसी भाव के साथ शुरू की गई है। १८ नवम्बर को चातुर्मास के अवसर पर कार्यकर्ता और सभी सहयोग करने वालों का सम्मान किया जाएगा।