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स्पेस किड्स इंडिया का उद्देश्य युवा वैज्ञानिक तैयार करना

स्पेस किड्स इंडिया का मुख्य उद्देश्य युवा वैज्ञानिक तैयार करना है और उन्हें रियल टाइम प्रोजेक्ट में शामिल कर नई तकनीक इजाद करना...

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Space Kids India aims to prepare young scientists

Space Kids India aims to prepare young scientists

चेन्नई।स्पेस किड्स इंडिया का मुख्य उद्देश्य युवा वैज्ञानिक तैयार करना है और उन्हें रियल टाइम प्रोजेक्ट में शामिल कर नई तकनीक इजाद करना है। कलाम सेटेलाइट के एक वर्ष पूरा करने पर शुक्रवार को चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए एसकेआई की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. श्रीमती केसन ने कहा कि वर्ष २०१९ में मून मिशन पर काम चल रहा है।

वह एक सेटेलाइट के निर्माण में लगे हुए हैं जो चांद पर उतरने वाला सबसे हल्का सेटेलाइट होगा। इस से पहले स्पेस किड्स इंडिया की टीम ने विश्व की सबसे हल्की, छोटी और थ्री-डी सेटेलाइट का निर्माण किया है। इस ३.८ सीएम क्यूब सेटेलाइट का वजन ६४ ग्राम है।

इस सेटेलाइट को एशिया बुक ऑफ रिकार्ड, युआरएफ बुक ऑफ रिकार्ड, इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड और एसेस्ट बुक ऑफ रिकार्ड में जगह मिली है। स्पेस किड्स मून मिशन के अलावा एसकेआई लैब्स, एजुक्रिप्ट, एनएसएलवी राजस्थान, हेल्थ ड्रिंक आदि परियोजनाओं पर काम कर रही है। मून मिशन पहला थ्री-डी प्रिंटेड रोवर होगा जिसे वर्ष २०१९ के अंत तक लांच कर दिया जाएगा। स्काई लैब्स ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफार्म है जिससे विद्यार्थी विज्ञान व तकनीकी के बारे में हैंड ऑन एक्सपीरिएंस ऑनलाइन ले सकेंगे।

एजुक्रिप्ट अकादमिक सर्टिफिकेट के वेरीफिकेशन का काम करेगा, एनएसएलवी राजस्थान सरकार के साथ मिलकर सेटेलाइट बनाएगी और हेल्थ ड्रिंक शुद्ध जैविक उत्पाद है जिसमें चीनी की मात्रा बिल्कुल भी नहीं है।

एस. रामदास ने कर्नाटक के सीएम के बयान की निंदा की

पीएमके संस्थापक एस. रामदास ने शुक्रवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी. कुमारस्वामी के उस बयान की निंदा की जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके राज्य के किसानों के लाभ के लिए कृष्णराजसागर बांध से कावेरी जल छोड़ा जाएगा। यहां जारी एक विज्ञप्ति में रामदास ने कहा कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन नहीं होने की वजह से ही कर्नाटक के सीएम इस तरह के हालात बना रहे हैं।

उन्होंने कहा यह शत-प्रतिशत सच है कि कर्नाटक द्वारा की जा रही देरी की वजह से ही सीडब्ल्यूएमबी का गठन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अगर सीडब्ल्यूएमबी का गठन भी हो जाए तो कावेरी प्रबंधन आयोग की तुलना में कर्नाटक के पास ज्यादा ताकत होगी जिसके लिए कर्नाटक सरकार ने प्रबंधन आयोग को स्वीकार नहीं किया।

कर्नाटक सरकार अपनी चतुराई से राज्य के सारे बांधों के जल का इस्तेमाल कर लेना चाहती है लेकिन तमिलनाडु और केंद्र सरकार द्वारा कर्नाटक को ऐसा नहीं करने दिया जाएगा।