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Space Technology : Space से होंगे निजी कंपनियों के वारे-न्यारे

- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उद्योग में उतर रहे स्टार्ट अप - लाखों करोड़ की है स्पेस इंडस्ट्री

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Space Technology : Space से होंगे निजी कंपनियों के वारे-न्यारे

Space Technology : Space से होंगे निजी कंपनियों के वारे-न्यारे

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी आधारित उद्योग के विकास और विस्तार की विपुल संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र को भी निजी भागीदारी के लिए खोल दिया गया है। एक अनुमान के अनुसार २०४० तक इस इंडस्ट्री का ग्लोबल मार्केट १ ट्रिलीयन डॉलर तक पहुंच जाएगा जो कई देशों की जीडीपी से ज्यादा होगा।


अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निजी कंपनियों के सहकार को बढ़ावा देने का जिम्मा 'इन-स्पेसÓ का है। इन-स्पेस ने निजी कंपनियों और स्टार्ट- अप्स के लिए इसरो की सुविधाओं के उपयोग, इसरो परिसरों के अंदर सुविधाओं का विकास, उपग्रहों एवं प्रक्षेपण रॉकेटों के प्रक्षेपण और परामर्शी सहायता के लिए भारतीय अंतरिक्ष कंपनियों को अधिकृत करना शुरू कर दिया है।


१३५ गैर सरकारी कंपनियों से मिले आवेदन
लोकसभा में तमिलनाडु की तुत्तुकुड़ी सांसद कनिमोझी करुणानिधि के पूछे गए सवाल पर प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह से मिले जवाब के अनुसार अभी तक, इन स्पेस ने अंतरिक्ष क्षेत्र में 135 गैर सरकारी कंपनियों से आवेदन प्राप्त किए हैं। भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप्स को प्रारंभिक वित्तीय सहायता देने के लिए इन-स्पेस बोर्ड ने नई बीजक निधि योजना भी शुरू की है। सरकार इसमें विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एफडीआइ नीति और राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति में संशोधन लाने पर भी कार्य कर रही है।


आयात-निर्यात कारोबार
फिलहाल स्पेस इंडस्ट्री में भारत कई वस्तुओं के लिए आयात पर निर्भर है। 2021-22 में प्रमुख रूप से ई.ई.ई. घटक, उच्च शक्ति कार्बन-कार्बन फाइबर, अंतरिक्ष- अर्हता प्राप्त सोलर सेल, संसूचक, ऑप्टिक्स व पावर एम्प्लीफायर्स आदि का आयात हुआ जिनक मूल्य 2,114 करोड़ रुपए रहा। इसी तरह इसी अवधि में 174.90 करोड़ की राशि प्रक्षेपण सेवाओं, डेटा विक्रय एवं कक्षीय सहायता सेवाओं और प्रक्षेपण पश्चात संचालन सेवाओं के निर्यात से अर्जित की गई।


स्टार्ट अप कंपनियां
भारत में करीब पंद्रह स्पेस स्टार्ट अप कंपनियां अपना भाग्य आजमा रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) इनकी सहायता कर रहा है। इंडिया स्पेस कांग्रेस के अनुसार भारतीय स्पेस अर्थव्यवस्था २०२५ में १२.८४४ बिलीयन डॉलर की होगी।