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एससी, एसटी, ओबीसी, महिला कोटा के लिए संविधान में संशोधन करें केन्द्र: स्टालिन

सामाजिक न्याय किसी विशेष राज्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जब भाजपा सत्ता में थी तो यह एक अखिल भारतीय मुद्दा था।

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एससी, एसटी, ओबीसी, महिला कोटा के लिए संविधान में संशोधन करें केन्द्र: स्टालिन

एससी, एसटी, ओबीसी, महिला कोटा के लिए संविधान में संशोधन करें केन्द्र: स्टालिन

चेन्नई.

मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने 2015 में हुई जाति जनगणना को जारी करने का आग्रह किया है। उन्होंने केंद्र से कहा कि एससी/एसटी के लिए आरक्षण उचित तरीके से लागू किया जाना चाहिए और बीसी और एमबीसी के लिए उचित कोटा होना चाहिए। साथ ही इसकी राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी की जानी चाहिए। मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने के प्रबल समर्थक स्टालिन ने मंगलवार रात यहां (यह कार्यक्रम दिल्ली में आयोजित किया गया था) सामाजिक न्याय के लिए भारत पर दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए उन्होंने दोहराया कि सामाजिक न्याय किसी विशेष राज्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जब भाजपा सत्ता में थी तो यह एक अखिल भारतीय मुद्दा था।

मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं। उन्होंने कहा "जाति और समुदायों की गणना का पैमाना अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो सकता है। तमिलनाडु 69 प्रतिशत आरक्षण का पालन करता है। हालांकि अन्य राज्यों में प्रतिशत अलग-अलग है, लेकिन आरक्षण की समस्या हर जगह एक जैसी है और यह उपेक्षा है।

चुनावी हथकंडा करार दिया
स्टालिन ने कहा कि ऐसे विधेयक को अभी लाना अजीब चाल है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह 2029 में लागू होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए परिसीमन की कवायद होगी जो कि प्रस्तावित जनगणना पर आधारित होगी जिसके लिए कोई तय समसीमा नहीं है। स्टालिन ने पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने पर जोर दिया और मांग की कि केंद्र सरकार तमिलनाडु तथा पूरे दक्षिण भारत के लोगों को आश्वस्त करे कि परिसीमन से उन राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा, जिन्होंने अपने यहां जनसंख्या पर नियंत्रण किया है।

स्टालिन ने कहा, परिसीमन तमिलनाडु और दक्षिण भारत के सिर पर लटकी तलवार की तरह है। दक्षिण भारत के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने की राजनीतिक साजिश को नाकाम किया जाना चाहिए। राजनीतिक रूप से सजग तमिलनाडु’ को धोखा देने के प्रयास को शुरू में ही खत्म कर देना चाहिए। उन्होंने महिला विधेयक को चुनाव में हार की आशंका के बीच हथकंडा करार दिया गया। स्टालिन ने यह बताने की भी मांग की है कि क्यों केंद्र ने महिला विधेयक को पारित कराने के लिए वैसा रुख नहीं दिखाया जैसा कि उसने अनुच्छेद 370 को रद्द कराने और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण (विधेयक) को लेकर प्रदर्शित किया था।