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जलवायु परिवर्तन पर नया अध्ययन, बर्फबारी के बढ़ने से ऊंचे होते महासागरों के बढ़ते जलस्तर पर कमी आ सकेगी

जलवायु परिवर्तन पर नया अध्ययन- बर्फबारी के बढ़ने से ऊंचे होते महासागरों के बढ़ते जलस्तर पर कमी आ सकेगी

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चेन्नई. जलवायु परिवर्तन पर हुए एक नए अध्ययन के अनुसार अंटार्कटिका सहित दुनिया में बर्फबारी के बढ़ने से ऊंचे होते महासागरों के बढ़ते जलस्तर पर कमी आ सकेगी। हाल के कुछ सालों से दुनिया में हो रहे शोध जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की इंटरगवर्नमेंटल पैनल फॉर क्लाइमेट चेंज की रिपोर्ट में भी कुछ ऐसा ही सामने आया है। नए अध्ययन ने चौंकाने वाला निष्कर्ष पेश करते हुए अनुमान लगाया है कि दक्षिणी गोलार्द्ध के महासागरों में बढ़ते हुए जलस्तर को कम करने का काम बर्फबारी में होने वाला इजाफा करेगा जिसका संबंध ध्रुव के गर्म वायुमंडल से संबंध है।
नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने आधुनिक पद्धतियों का उपयोग करते हुए समुद्री जलस्तरों में बदलाव की गणना करने का प्रयास किया। उन्होंने पाया कि दुनिया के दो अलग अलग स्थानीय जलवायु ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फ की चादरें अलग तरह से प्रतिक्रिया कर रही हैं। यह शोध जियोफिजिकल रिसर्च लैटर्स में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन की खासियत यह है कि यह नई पीढ़ी के क्लाइमेट मॉडल्स पर आधारित है जिन्हें हाल ही में प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र की इंटरगवर्नमेंटल पैनल फॉर क्लाइमेट चेंज की छठवीं रिपोर्ट में उपयोग किया गया। इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन संबंधित वैज्ञानिक, तकनीकी और सामाजिक-आर्थिक जानकारी की समीक्षा की गई थी।
साठ शोधकर्ता हुए शामिल
इस परियोजना में 44 संस्थानों के 60 शोधकर्ताओं ने काम किया और पहली बार बर्फ की चादरों से समुद्री जल स्तरों के बढ़ने के प्रक्रिया आधारित सामुदायिक अनुमान लगाए गए। शोध विशेष तौर पर इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहा था कि कैसे वर्तमान संयुक्त राष्ट्र की इंटरगवर्नमेंटल पैनल फॉर क्लाइमेट चेंज के आंकलनों में उपयोग में लाए गए नई पीढ़ी की जलवायु मॉडल के अनुमान पिछली पीढ़ी के अनुमानों से अलग थे। शोधकर्ताओं का कहना है कि नए मॉडल में बढ़ती गर्माहट का मतलब ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर का और ज्यादा पिघलना है। अंटार्कटिका में समुद्री जल स्तर में बहुत कम बदलाव का अनुमान है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि गर्म महासागरों से पिघलने वाली बर्फ के नुकसान की भरपाई बढ़ी हुई बर्फबारी ने कर दी जिसका संबंध गर्म ध्रुवीय वायुमंडल से है।
बढ़ा हुआ समुद्री जल स्तर पिछली पीढ़ी के अनुमानों से कितना अलग
ब्रिस्टल के स्कूल ऑफ जियोग्राफिकल साइंसे के प्रमुख प्रोफेसर टोनी पेने का कहना है कि टीम यह स्थापित करने का प्रयास कर रही है कि क्या नई पीढ़ी के क्लाइमेट मॉडल के द्वारा अनुमानित बढ़ा हुआ समुद्री जल स्तर पिछली पीढ़ी के अनुमानों से कितना अलग है। नए मॉडल आमतौर पर अधिक गर्माहट का अनुमान लगाते हैं. लेकिन हम यह समझना चाहते थे कि इसका बर्फ की चादरों के लिए क्या मतलब है। यह बर्फबारी और समुद्री बर्फ पिघलने के बीच के बड़े बदलावों से संबंधित है। इसमें बड़ी बात यह जानना है कि दो बर्फ की चादरें कैसे प्रतिक्रिया दे रही हैं। ग्लोबल वार्मिंग का उन पर प्रभाव कितना अलग हो रहा और वे स्थानीय हालातों पर कितना ज्यादा निर्भर करती हैं।