
Sub-way is not Meena Bazar ...
चेन्नई।तांबरम स्थित जीएसटी रोड पर रेलवे स्टेशन और बस टर्मिनस को जोडऩे के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा बनाया गया सब-वे सालों से दुकानदारों के अवैध अतिक्रमण का शिकार है। हालांकि इसका निर्माण यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर किया गया था लेकिन इस अतिक्रमण के चलते उन्हें इस पार से उस पार जाने के लिए जान जोखिम में डालकर सब-वे छोडक़र सडक़ का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
सब-वे का नजारा तो अगर मीना बाजार नहीं तो इससे कम भी नहीं है। यहां राहगीरों के आने-जाने के लिए रास्ता कम और खाने-पीने से लेकर फूल एवं सब्जियों की दुकानें अधिक हैं। इसे देखकर कभी-कभी ऐसा लगता है कि यह सब-वे कम और बाजार अधिक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तांबरम नगरपालिका के लोगों ने इसे कई बार खाली कराने का प्रयास किया लेकिन दुकानदारों के पास राजनीतिक पार्टियों का संरक्षण के कारण इसे खाली नहीं कराया जा सका है। लोगों की शिकायतहै कि इस अतिक्रमण का खामियाजा उन राहगीरों को भुगतना पड़ता है जिनकी सुरक्षा के लिए इसे बनाया गया था।
उल्लेखनीय है कि आमजनों को सुलभ एवं सुरक्षित यात्रा मुहैया कराने के लिए कुछ साल पहले राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने 15 करोड़ रुपए की लागत तांबरम समेत आलंदूर एवं पल्लावरम में सब-वे का निर्माण करवाया था लेकिन कमोबेस सभी का एक जैसा हाल है। इनमें सबसे खराब हाल तांबरम सब-वे का है। असुविधाओं के चलते यहां के लोगों ने प्रशासन से कई बार इसकी शिकायत की है लेकिन अभी भी रोजाना यहां बेतरतीब दुकानें लगती हैं। तांबरम सेनिटोरियम निवासी अरुणाचलम का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने इन दुकानों को यहां से कई बार हटवाया है लेकिन राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण यह दुकानदार कुछ दिनों बाद फिर यहां अपनी गृहस्थी शुरू कर देते हैं।
जब पत्रिका संवाददाता ने यहां के दुकानदारों से पूछताछ की तो सब-वे में स्टेशनरी की दुकान चला रही हसीना बीबी ने बताया कि वह छोटी उम्र से ही अपनी मां के साथ इस दुकान पर आ रही है। यह दुकान ही उनके परिवार की आजीविका का एक मात्र साधन है अगर इसे बंद कर दिया गया तो उनके परिवार का जीवन-यापन करना मुश्किल हो जाएगा।
यहां खिलौने की दुकान चलाने वाले एम. पन्नीरसेल्वम नामक एक अन्य दुकानदार ने बताया कि पिछले पांच वर्षों से वह यहां दुकान लगा रहा है तथा प्रतिदिन लगभग चार सौ रुपए की कमाई कर लेता है।
उसने कहा कि हालांकि इस मंहगे शहर में यह रकम पर्याप्त नहीं है लेकिन मुश्किल से ही सही किसी तरह इसी के सहारे गाड़ी खींच रहा है। अगर यह दुकान नहीं रहेगी तो खाने के लाले पड़ जाएंगे।
स्थानीय निवासी वी. मोहन का कहना है कि यह सच है कि सब-वे के अंदर अवैध दुकान चलाना गलत है लेकिन यह भी सही है कि यह सब-वे में खुली इन दुकानों के भरोसे ही कई गरीब लोगों की जिंदगी चल रही है। आदमी को अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ता है। दूसरे राहगीर ने कहा कि चाहे जो भी हो इस तरह का अवैध कब्जा कतई ठीक नहीं। बिजी अवर्स में तो सब-वे का इस्तेमाल करना बड़ा दुर्गम साबित होता है। प्रशासन को इन दुकानदारों को विस्थापित करना चाहिए।
स्टेट हाईवे बनाएगा एफओबी
सूत्रों के मुताबिक जीएसटी रोड पर भारी जाम होने कारण राहगीरों को सडक़ पार करने में हो रही असुविधा से निजात दिलाने के लिए पिछले साल स्टेट हाईवे विभाग ने तांबरम रेलवे स्टेशन और बस टर्मिनस के बीच २४० मीटर लम्बा फुट ओवरब्रिज बनाने का प्रस्ताव पारित किया था। इस काम के लिए 1३.७ करोड़ रुपए की अनुमानित धन राशि तय की गई थी लेकिन इस फुट ओवरब्रिज का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
राहगीरों का कहना है...
पीक आवर्स में इस सब-वे से होकर पैदल निकलना आसान नहीं होता। दोनों ही तरफ दुकानें सजी होने के कारण पैदल यात्रियों के आने-जाने के लिए लगभग नहीं के बराबर जगह बचती है। भीड़ के चलते कई बार तो राहगीर एक दूसरे ऊपर गिर भी जाते हैं। आर. श्रीनिवासन, पैदल यात्री तांम्बरम निवासी।
सब-वे में प्रकाश का पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण शाम को अंधेरे के चलते कई बार यात्रियों का पैर सब-वे में सजी दुकानों पर पड़ जाता है इनसे कहासुनी तक हो जाती है। कभी-कभी तो यह बहस झगड़े का रूप अख्तियार कर लेती है। लोग अधिकारियों से इसकी शिकायत भी करते हैं लेकिन हालात बदस्तूर है। जी.सबरी, पड़पई निवासी।
Published on:
01 Apr 2018 09:32 pm
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