
Sylendra Babu
चेन्नई. सी शैलेन्द्र बाबू तमिलनाडु के नए पुलिस महानिदेशक होंगे। वे जे.के. त्रिपाठी का स्थान लेंगे। त्रिपाठी 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। 1987 बैच के आईपीएस शैलेन्द्र बाबू ने गोबिचेट्टीपलायम में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में सेवा की शुरुआत की। जिसके बाद उन्हें एसपी के रूप में पदोन्नत किया गया। उन्होंने चेंगलपट्टू और कांचीपुरम सहित अन्य जिलों में सेवाएं दी। वे अड्यार के डीसीपी भी रहे। चेन्नई के संयुक्त आयुक्त के रूप में भी काम किया। उन्होंने कोयंबत्तुर शहर के आयुक्त और आईजी उत्तर क्षेत्र के रूप में कार्य किया। एडीजीपी के रूप में पदोन्नत होने के बाद उन्होंने रेलवे के अलावा जेलों और तटीय सुरक्षा समूह में भी काम किया। उन्हें मार्च 2019 में डीजीपी के रूप में पदोन्नत किया गया और डीजीपी (रेलवे) के रूप में पदभार संभाला। वे 1 जुलाई, 2021 से कार्यभार संभालेंगे। गृह विभाग के एक सरकारी आदेश में राज्य सरकार द्वारा शैलेन्द्र बाबू को राज्य का नया शीर्ष पुलिस अधिकारी नियुक्त करने की घोषणा की गई। राज्य सरकार ने अपने आदेश में कहा कि सरकार ने अपने सेवा रिकॉर्ड के साथ आयोग की सिफारिशों की सावधानीपूर्वक और स्वतंत्र रूप से जांच की है। सरकार ने उचित विचार के बाद 01 जुलाई 2021 से डॉ सी. शैलेन्द्र बाबू को पुलिस महानिदेशक तमिलनाडु और पुलिस बल के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया।
यूपीएससी ने किया था तीन नामों का चयन
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी ) ने तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद के लिए तीन नामों को शॉर्टलिस्ट किया था और सूची को नियुक्ति के लिए राज्य सरकार को भेज दिया था। ये तीन नाम थे - सी शैलेन्द्र बाबू व करण सिंघा जो दोनों 1987 बैच तथा संजय अरोड़ा जो 1988 बैच के थे। तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक के पद के लिए संभावितों को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार को नई दिल्ली में संघ लोक सेवा आयोग कार्यालय में एक बैठक आयोजित की गई। डेढ़ घंटे तक चली बैठक में तमिलनाडु तथा यूपीएससी के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया। तमिलनाडु के प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव इरै अन्बु, डीजीपी जेके त्रिपाठी और गृह सचिव एसके प्रभाकर शामिल थे। आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार तीन नामों की एक सूची को अंतिम रूप दिया गया था। राज्य सरकार तीनों में से एक को चुनने के लिए बाध्य थी। पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ संवाद करने के बाद ही निर्णय लिया गया। वर्तमान डीजीपी जेके त्रिपाठी की निर्धारित सेवानिवृत्ति 30 जून को पूरी होने के कारण कवायद की आवश्यकता थी।
एक दर्जन अधिकारी थे दौड़ में
इस दौड़ में लगभग एक दर्जन आईपीएस अधिकारी थे। इससे पहले 1987 से 1989 के आईपीएस बैचों के संकलित तमिलनाडु कैडर के डीजीपी रैंक के अधिकारियों को शॉर्टलिस्टिंग के लिए यूपीएससी को भेजा गया था। रिपोर्टों में कहा गया था कि राज्य सरकार से प्राप्त अधिकारियों की सूची के साथ, यूपीएससी डीजीपी के पद के लिए विचार किए जाने वाले तीन से पांच नामों को शॉर्टलिस्ट करेगा और संबंधित राज्य सरकार तीन या पांच की अंतिम सूची में से एक अधिकारी को चुन सकती है।
युवा पीढ़ी में भी लोकप्रिय
सी. शैलेन्द्र बाबू राज्य के सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी थे। बाबू तमिलनाडु में एक जाना-पहचाना नाम है क्योंकि पुलिस विभाग में उनकी सेवा के अलावा वह युवा पीढ़ी के करीब भी रहे हैं और उन्हें अपने करियर में प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल पदों पर कार्य किया है। करण सिंघा राज्य के दूसरे सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं और वह भी उसी 1987 बैच के हैं। उनके अलावा आईपीएस अधिकारी संजय अरोड़ा, शंकर जीवाल (वर्तमान चेन्नई पुलिस आयुक्त), एके विश्वनाथन (चेन्नई के पूर्व पुलिस आयुक्त), आभाष कुमार, टीके रविचंद्रन, सीमा अग्रवाल, अमरेश पुजारी, एम. रवि, करुणा सागर और जयंत मुरली भी दौड़ में थे।
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Published on:
29 Jun 2021 08:22 pm
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