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पैर काटने की थी नौबत, डॉक्टरों की टीम ने इलाज कर दिया नया जीवनदान

एसएलई पूरे शरीर में फैल सकता है जिससे दोनों पैर प्रभावित हो सकते है। एसएलई का कोई इलाज नहीं है। हालांकि, उपचार लक्षणों को कम करने या नियंत्रित करने में मदद कर सकता है और गंभीरता के आधार पर भिन्न हो सकता है।

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पैर काटने की थी नौबत, डॉक्टरों की टीम ने इलाज कर दिया नया जीवनदान

पैर काटने की थी नौबत, डॉक्टरों की टीम ने इलाज कर दिया नया जीवनदान

चेन्नई.

राजीव गांधी सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने दुर्लभ बीमारी सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (एसएलई) से ग्रस्त एक लड़की अभिन्या का इलाज कर उसे नया जीवनदान दिया है। इससे पहले डॉक्टरों ने उसे पैर काटने का सुझाव दिया था लेकिन अब डॉक्टरों के इलाज के बाद वह सहारे से चल पा रही है। सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमैटोसस (एसएलई) एक ऑटोइम्यून बीमारी है, इस बीमारी में हृदय, फेफड़े, गुर्दे और मस्तिष्क भी प्रभावित होता हैं और जीवन को खतरा हो सकता है।

एसएलई पूरे शरीर में फैल सकता है जिससे दोनों पैर प्रभावित हो सकते है। एसएलई का कोई इलाज नहीं है। हालांकि, उपचार लक्षणों को कम करने या नियंत्रित करने में मदद कर सकता है और गंभीरता के आधार पर भिन्न हो सकता है।

अभिन्या कई अस्पतालों में डॉक्टरों से मिली लेकिन उसका कोई सटीक इलाज नहीं मिला। उसके पैर काटने का सुझाव सोशल मीडिया में वायरल हो गया और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को इसकी जानकारी हुई। उनके निर्देश पर स्वास्थ्य मंत्री ने परिवार से संपर्क किया और उसे राजीव गांधी सरकारी अस्पताल लाया गया। राजीव गांधी सरकारी अस्पताल के डीन डॉ. ई तेरानीराजन ने कहा कि विशेषज्ञों और डॉक्टरों की टीम ने पैर की उंगलियों को काटा जिसके बाद अंग विच्छेदन करने की कोई आवश्यकता नहीं हुई। उसके पैर को सहारा देने के लिए प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञों द्वारा ग्राफ्टिंग की गई है।