
Loksabha Election 2024: राजधानी के पास रहकर भी विकास से काफी दूर है विल्लुपुरम लोकसभा क्षेत्र
विल्लुपुरम.
विल्लुपुरम लोकसभा क्षेत्र वैसे तो राजधानी चेन्नई से मात्र 100 किमी की दूरी पर है लेकिन विकास के मामले में यह काफी पिछड़ा हुआ है। पुरानी नगरपालिका होने के बावजूद यह शहर सामाजिक और आर्थिक रूप से काफी पिछड़ा हुआ है। इसके पिछड़ेपन का मुख्य कारण दो तिहाई आबादी का कृषि पर निर्भर होना तो है ही साथ ही साथ जाति और सामुदायिक मतभेद भी इसके विकास में बड़ा बाधक है। इस निर्वाचन क्षेत्र में वन्नियरों की एक बड़ी आबादी है। जनसंख्या अधिक होने के कारण राजनीतिक पार्टियां पहले इसी जाति के लोगों को अपना उम्मीदवार बनाने का प्रयास करती थीं लेकिन 2009 के परिसीमन में दिंडिवनम विधानसभा क्षेत्र को इसमें शामिल कर इसे आरक्षित सीट घोषित किए जाने के बाद से पार्टियों को यहां के लिए योग्य उम्मीदवार चुनने के लिए काफी मशक्कत करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि दिंडिवनम, वनूर, विल्लुपुरम, विक्रवंडी, तिरुकोइलुर और उलुंदुरपेट में से दो सीटें आरक्षित कोटे की हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में दिंडिवनम और वनूर नामक दोनों आरक्षित सीटें अन्नाद्रमुक ने जीती थी जबकि अन्य चार सीटों पर डीएमके को विजय मिली थी।
किसी पार्टी ने नहीं किया समुचित विकास
पिछले कुछ लोकसभा चुनावों के परिणामों पर नजर डालें तो क्षेत्र की जनता ने राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों द्रमुक और अन्नाद्रमुक को लगभग समान मौका दिया है लेकिन विकास के लिहाज से यह इलाका काफी पिछड़ा हुआ है। यहां शिक्षा और रोजगार के अवसर तो बर्बाद हैं ही साथ ही साथ बेहतर सिंचाई के अभाव में खेती भी बर्बाद होती जा रही है। लोगों के बीच जातिगत और सामुदायिक मतभेद भी यहां के पिछड़ेपन की एक बड़ी वजह है। उदयन नामक एक स्थानीय निवासी ने बताया कि जाति, धर्म और लैंगिक भेदभाव के चलते किसी भी नए बिजनेस आउटलेट को विल्लुपुरम से दूर रखा गया है।
शैक्षणिक सुविधाओं का अभाव
क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थाओं की कमी का हवाला देते हुए एक निजी विद्यालय की अध्यापिका ने बताया कि इस कमी के चलते युवाओं को उच्च शिक्षा पाने के लिए जिले से बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके चलते आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते। स्कूली शिक्षा के आंकड़ों के मुताबिक विल्लुपुरम के 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले 35 फीसदी विद्यार्थी कॉलेज जाने में असफल हो जाते हैं।
अपर्याप्त सिंचाई सुविधा
सिंचाई सुविधा की कमी की चर्चा करते हुए स्थानीय किसान नेता जी. कालीवर्धन ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार यहां के 75 प्रतिशत मतदाता किसान हैं इसके बावजूद यहां सिंचाई व्यवस्था काफी खराब है। हालत यह है कि एलिस चैटराम और थलावानूर नामक दो चेक बांधों की मरम्मत का काम अधूरा पड़ा हुआ है। सिंचाई का मुख्य स्रोत होने के बावजूद अन्नाद्रमुक और द्रमुक दोनों इन बांधों को बहाल करने में विफल रहे हैं। मानसून में अच्छी बारिश के बावजूद बांधों की अनुपलब्धता के कारण पानी संग्रहित नहीं किया जा सकता। इसके कारण किसानों को सूखे का सामना करना पड़ सकता है। स्थानीय लोगों को इस बार ऐसी सरकार की दरकार है जो उन्हें पानी मुहैया करा सके।
सभी प्रत्याशियों को जीत का भरोसा
गौरतलब है कि इस बार रविकुमार को अपनी जीत का पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि देश के लोग भाजपा की सांप्रदायिक और विभाजनकारी राजनीति से निराश हैं। इसलिए इस बार इंडिया गठबंधन की जीत निश्चित है। एनडीए गठबंधन की ओर से पीएमके प्रत्याशी एस मुरली शंकर को भी अपनी जीत का पूरा भरोसा है। भले ही उम्र के लिहाज से उनके पास अनुभव की थोड़ी कमी हो लेकिन फुटबॉल कोच के रूप में युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता काफी अधिक है। अपनी जीत का भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि मुझे जन कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करने के लिए सिर्फ एक मौका चाहिए। जिले में कृषि से लेकर विकास तक हर मुद्दे का समाधान किया जाएगा। इस लोकसभा सीट के तीसरे प्रमुख उम्मीदवार अन्नाद्रमुक के जे. बक्कियाराज (41) हैं। भले ही वे इस चुनाव में एक नया चेहरा हों लेकिन उनके अभियान को पूर्व मंत्री और क्षेत्र के पार्टी के कद्दावर नेता सी. वी. शनमुगम का समर्थन प्राप्त है।
Published on:
01 Apr 2024 07:17 pm
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