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आयुर्वेद के देवता हैं धन्वन्तरि : ज्ञानगुरुमुरलीधर स्वामी

यहां वालाजा स्थित श्री धन्वन्तरि आरोग्य पीठम में आगामी २९ अप्रेल को चितरै पूर्णिमा के अवसर पर 22वां शिवलिंगों का महाभिषेक एवं महायज्ञ आयोजित

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The god of Ayurveda is Dhanvantari: Gyan Guru Murlidhar Swami

The god of Ayurveda is Dhanvantari: Gyan Guru Murlidhar Swami

वेलूर।यहां वालाजा स्थित श्री धन्वन्तरि आरोग्य पीठम में आगामी २९ अप्रेल को चितरै पूर्णिमा के अवसर पर 22वां शिवलिंगों का महाभिषेक एवं महायज्ञ आयोजित होगा। इस महायज्ञ का आयोजन 468 यज्ञशालाओं में ब्राहा्रणों, ज्योतिषियों व संतों के कल्याण के लिए एवं महान सिद्धरों के लिए किया जाएगा। इस मौके पर 468 सिद्धरों के रूप में स्थापित शिवलिंगों का महाभिषेक, पूजा तथा महायज्ञ होगा।
बुधवार को आरोग्य पीठम के संस्थापक ज्ञान गुरु श्री मुरलीधर स्वामी ने पत्रकारों को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि श्री धन्वन्तरि पीठम में अब तक जनकल्याण के उद्देश्य से हजारों बार यज्ञ व दैविक भक्ति से विभिन्न देवी देवताओं की पूजा अर्चना का आयोजन हो चुका है।


लेकिन इस बार चितरै पूर्णिमा के अवसर पर हिन्दू धर्म के विकास में एवं भक्ति भाव से देवी देवताओं की पूजा अर्चना करने वाले ब्राहा्रणों, पुजारियों व ज्योतिषियों के परिवारों के कल्याण के लिए 468 महान सिद्धरों के रूप में शिवलिंग स्थापित किए गए हैं। इन शिवलिंगों का अभिषेक और 468 यज्ञशालाओं में महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है।
आगामी २९ अप्रेल को भगवान सत्यनारायण के सान्निध्य में शिवलिंगों का अभिषेक होगा, साथ ही गणपति यज्ञ, पार्वती यज्ञ, गंधर्वराज यज्ञ, शंन्दान गोपाल यज्ञ व श्री नवग्रह यज्ञ भी होगा। दोपहर 1 बजे पीठम परिसर में निर्मित मंदिर में विराजित माता गोमवल्ली एवं पिता श्रीनिवासन का दुग्धाभिषेक एवं पुष्पाभिषेक से महाभिषेक होगा तथा पूजा व आराधना होगी।


शाम को राहू-केतु का अन्नाभिषेक होगा तथा बाद में भगवान सत्यनारायण की पूजा व कथा होगी। साथ ही श्रद्धालुओं में महाप्रसाद वितरित किया जाएगा। स्वामी ने बताया कि देश में श्री धन्वन्तरि मंदिर व पीठम सिर्फ दो स्थानों पर ही है। हिन्दू संस्कृति में धनतेरस सुख, समृद्धि और वैभव का पर्व माना जाता है। दीपावली के दो दिन पूर्व धनतेरस के दिन आयुर्वेद के देवता धन्वन्तरि की पूजा की जाती है। इस पर्व का संबंध विशेषत: भगवान धन्वन्तरि से ही है। धन्वन्तरि एवं माता लक्ष्मी इन दोनों का अवतरण समुद्र मंथन के दौरान हुआ और दोनों ही हाथ में कलश लेकर अवतरित हुए थे। श्री धन्वन्तरि पीठम में हर पूर्णिमा को उन युवक व युवतियों जिनके विवाह में रुकावट आती है, के लिए गंधर्वराज यज्ञ एवं स्वयंवर कल्पवती यज्ञ कर बाधा को दूर किया जाता है। इसके साथ ही पुत्र प्राप्ति के लिए दंपतियों के लिए शंदान गोपाल यज्ञ किया जाता है।

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