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मदुरै के बाद अब तिरुचि को दूसरी राजधानी बनाने की मांग

- कांग्रेस सांसद ने भी दी आवाज

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two city names observed for tamilnadu second capital

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चेन्नई.

मदुरै को तमिलनाडु की दूसरी राजधानी घोषित किए जाने को लेकर राज्य के दो मंत्रियों आर. बी. उदयकुमार और सेलूर राजू ने झंडा उठाया है। इस कड़ी में तमिलनाडु का का केंद्रीय भाग तिरुचि को बताते हुए इसे राजधानी घोषित करने की मांग भी बल पकडऩे लगी है। कांग्रेस सांसद एस. तिरुणावकरसु का कहना है कि तिरुचि को ही दूसरी राजधानी बनाना चाहिए।

मदुरै मूल के दो मंत्रियों के दूसरी राजधानी के विकल्प को तूल देने के बाद तिरुचि तलैनगरम नाम के संगठन के संयोजक जवाहर आरमुगम ने कहा कि इस मांग को लेकर व्यापारियों व जनता से रायशुमारी की जाएगी। मंत्रियों का यह कहना कि मदुरै को दूसरी राजधानी बनाने का सपना एमजीआर और जयललिता का था, झूठ है। एमजीआर ने अपने शासनकाल में तिरुचि को राजधानी बनाने के प्रयास किए थे। मेरा सवाल यह है कि क्या एमजीआर ने मंत्रियों के कान में चुपके से यह बात कही थी कि वे मदुरै को दूसरी राजधानी के तौर पर देखना चाहते है।

डीएमके का भी समर्थन
एमजीआर शासनकाल में तिरुचि को दूसरी राजधानी घोषित करने के प्रस्ताव का डीएमके ने विरोध किया था। अब पार्टी के जिला सचिव व पूर्व मंत्री केएन नेहरू ने भी तिरुचि की पुरजोर वकालत की है। सुबह पत्रकारों से वार्ता में उन्होंने कहा कि तिरुचि राज्य का मध्य भाग है। प्रशासनिक और न्यायिक प्रशासन की दृष्टि से भी यह केंद्रीय भाग में है। यहां से किसी भी शहर त्वरित गति से पहुंचा जा सकता है। एमजीआर के सपने से इतर एआईएडीएमके नेता बयानबाजी कर रहे हैं।

तिरुचि ही बने दूसरी राजधानी
तमिलनाडु कांग्रेस नेता व सांसद एस. तिरुणावकरसु ने भी दूसरी राजधानी के रूप में तिरुचि की ही वकालत की। उनका कहना था कि यह शहर राज्य के बीचों-बीच बसा है। चेन्नई महानगर की बढ़ती आबादी और अन्य समस्याओं का अनुमान लगाते हुए एमजीआर ने भी तिरुचि के नाम की पेशकश रखी थी। एमजीआर के बाद उन्होंने ही यह मांग उठाई थी। राज्य के किसी भी कोने से सड़क मार्ग से चार घंटे के भीतर तिरुचि पहुंचा जा सकता है। राजनीति को भुलाकर भौगोलिक दशाओं व जनता के हित में एआईएडीएमके सरकार को यह निर्णय करना चाहिए।