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200 करोड़ की सौ से अधिक परियोजनाओं से 1,500 करोड़ का लाभ: सोनोवाल

-केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आइआइटी मद्रास के डिस्कवरी सैटेलाइट कैंपस में अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र का किया उद्घाटन

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200 करोड़ की सौ से अधिक परियोजनाओं से 1,500 करोड़ का लाभ: सोनोवाल

200 करोड़ की सौ से अधिक परियोजनाओं से 1,500 करोड़ का लाभ: सोनोवाल

-नौवहन मंत्रालय की प्रौद्योगिकी शाखा एनटीसीपीडब्ल्यूसी अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और एप्लीकेशन प्रोडक्ट का करेगा विकास

चेन्नई.

केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग एवं आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोमवार को आइआइटी मद्रास के एनटीसीपीडब्ल्यूसी-डिस्कवरी कैंपस का उद्घाटन किया।राष्ट्रीय बंदरगाह, जलमार्ग और तटीय प्रौद्योगिकी केंद्र (एनटीसीपीडब्ल्यूसी) भारत सरकार के नौवहन मंत्रालय की प्रौद्योगिकी शाखा है, जिसका उद्देश्य बंदरगाह और जलमार्ग क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीक का विकास करना है। यह मुख्य रूप से बंदरगाह, तटीय और अंतर्देशीय जल परिवहन और इंजीनियरिंग में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और एप्लीकेशन प्रोडक्ट का विकास करने के साथ-साथ संबंधित चुनौतियों से निपटने के लिए फास्ट-ट्रैक इनोवेशन करेगा।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के समक्ष एनटीसीपीडब्ल्यूसी के शोधकर्ताओं ने वेव बेसिन उपकरण का प्रदर्शन करने के साथ-साथ इस अनुसंधान केंद्र में जारी प्रोजेक्ट दिखाए। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा यह केंद्र अन्य क्षेत्रों के अलावा तलछट परिवहन, नेविगेशन, ड्रेजिंग और गाद, बंदरगाह और तटीय इंजीनियरिंग, स्वायत्त प्लेटफार्मों और वाहनों के क्षेत्र में छात्रों, उद्योग और शिक्षाविदों के लिए एक अद्वितीय जीवंत केंद्र के रूप में कार्य करता है। उन्होंने कहा कि अब तक 200 करोड़ की 100 से अधिक परियोजनाओं- उत्पादों का विकास और संचालन प्रमुख बंदरगाहों, जलमार्गों, परमाणु ऊर्जा, राज्य समुद्री बोर्डों, नौसेना और कई अन्य सार्वजनिक उपक्रमों एवं राज्य एजेंसियों में किया गया है। इन उत्पादों ने 1,500 करोड़ रुपए से अधिक का मूर्त लाभ और लागत बचत प्रदान की है। उन्होंने कहा कि डिस्कवरी कैंपस में सेडिमेंटेशन मैनेजमेंट एंड टेस्ट बेसिनअत्याधुनिक लैब है जो बंदरगाहों और जलमार्गों और समुद्री सूचना और संचार प्रयोगशाला के लिए एक बड़ी उथली जल सुविधा है जहां आइवीटीएमएस और ई-नेविगेशन उत्पाद विकसित किए जाते हैं। इस अवसर पर आइआइटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर चेन्नई पोर्ट प्राधिकरण के चेयरमैन सुनील पालीवाल भी उपस्थित थे।

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