
हिन्दी साहित्य में बसन्त के अग्रदूत थे महाकवि निराला
चेन्नई. महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हिन्दी साहित्य में वसंत के अग्रदूत थे। वे सही अर्थों में क्रांतिकारी थे। उनके जीवन संघर्ष उनके साहित्य में आम आदमी के संघर्ष बन गए। उनकी जीवन शक्ति कभी हार को स्वीकार नहीं करती थी।
शासुन महाविद्यालय के हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित वसंतोत्सव एवं निराला स्मृति व्याख्यान में साहित्यकार बीएल आच्छा ने निराला के आर्थिक और सामाजिक संघर्षों के साथ पत्नी और बेटी की अकाल मृत्यु का जिक्रकरते हुए कहा कि हिन्दी की डाल आज जो हरीभरी और वासंती है वह निराला जैसे कवियों कारण ही है। वसंत को लाने के लिए सर्द थपेड़े सहने पड़ते हैं।
आच्छा ने कहा कि निराला महलों में गरीबों की पाठशाला खुलते देखना चाहते थे। यह नए जमाने का नजरिया था। इसीलिए साहित्य के नायक राजा नहीं रहे। किसान, मजदूर ही नहीं विधवा और भिखारी भी नायक बन गए। आज विश्व मंच पर हिन्दी और हिन्दी का साहित्य भारतीय भाषाओं के अनुवाद के साथ प्रतिष्ठित है। विभागाध्यक्ष डॉ. हर्षलता शाह और डॉ. सरोजसिंह ने स्वागत किया। डिंपल जैन ने कार्यक्रम का संचालन किया और शार्वि जैन ने आभार व्यक्त किया।
Published on:
05 Feb 2019 01:16 pm
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