
Desalination Plant in Chennai समुद्र के पानी पर भरोसा दिखा रही सरकार
चेन्नई. जलसंकट Water crisis की इस कदर भयावहता का सामना संभवत: पहले कभी चेन्नई नहीं किया है। समंदर तट पर बसे महानगरवासियों की प्यास बुझाने के सरकारी दावे नाकाफी साबित हो रहे हैं। इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है।
उद्योग- धंधे और शिक्षण संस्थाओं पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। अप्रभावी जल प्रबंधन को इसको जिम्मेदार माना जा रहा है। साथ ही विकल्प के रूप में समुद्री जल को पेयजल बनाकर आपूर्ति किया जाना एक विकल्प है जिस पर कार्य हो रहा है। फिर भी जल विशेषज्ञों की राय ठोस जल प्रबंधन नीति की है।
समुद्र के पानी को शुद्ध कर उपयोग किए जाने को लेकर भाजपा के राज्यसभा सांसद डा. सुब्रमण्यन स्वामी ने भी कहा था कि यह अच्छा उपाय है। उनका यह जवाब कावेरी जल विवाद पर था। उन्होंने मीडिया से कहा था कि तमिलनाडु को यह तय करना है कि उसे पानी चाहिए अथवा कावेरी का ही पानी चाहिए। जहां तक पानी उपलब्ध कराने की बात है कि डिसेलिनेशन प्लांट इसका उचित प्रबंध हो सकता है।
Chennai में २००३ के जल संकट के बाद सबसे पहले जयललिता सरकार ने समुद्र के खारे पानी को पेयजल बनाने की योजना पर कार्य शुरू किया। फिलहाल १०० एमएलडी वाले दो समुद्री जल निर्लवणीकरण (Desalination) प्लांट मिंजूर और नेमिली में चल रहे हैं। ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) पर नेमिली में १५० एमएलडी क्षमता वाला प्लांट स्थापित किया जाएगा। इसकी लागत १२५९.३८ करोड़ है जो केंद्र सरकार की अमृत योजना जर्मनी की फंडिंग एजेंसी केएफडब्ल्यू की मदद से लागू होगी।
इसी तरह ईसीआर के पेरूर में भी ४०० एमएलडी क्षमता वाले डिसेलिनेशन प्लांट को सैद्धांतिक अनुमति मिल गई है। इन दोनों परियोजनाओं के मूर्त रूप लेने पर दक्षिणी चेन्नई और आइटी कॉरिडोर की ३२ लाख की आबादी को जलापूर्ति संभव हो सकेगी।
सिविल विभाग, आइआइटी मद्रास
Published on:
22 Jun 2019 04:37 pm
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