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अब जिला अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए भी ब्लड एक्सजेंच पर लगेगा 1050 रुपए

ब्लड ट्रांसफ्यूजन फीस को कलेक्टर ने किया लागू, गरीब मरीजों की मुसीबत बढ़ी, रोज लगता है 50 यूनिट ब्लडपूर्व कलेक्टर ने फीस से दी थी छूट, अब केवल आयुष्मान व दीनदयाल कार्ड वालों को ही मिलेगी छूट

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अब केवल आयुष्मान व दीनदयाल कार्ड वालों को ही मिलेगी छूट

अब केवल आयुष्मान व दीनदयाल कार्ड वालों को ही मिलेगी छूट

छतरपुर। अब जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को भी एक यूनिट ब्लड बदलवाने में 1050 रुपए का ट्रांसफ्यूजन शुल्क देना होगा। जो जिला अस्पताल के रोगी कल्याण समिति के खाते में जाएगा। कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने पूर्व कलेक्टर रमेश भंडारी द्वारा जारी की गई छूट को खत्म कर दिया है। अभी तक केवल निजी अस्पताल में भर्ती मरीज को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से एक यूनिट ब्लड लेने के बदले एक यूनिट ब्लड और ट्रांसफ्यूजन फीस देनी होती थी। लेकिन अब ये शुल्क सभी के लिए लागू कर दिया गया है।

इन्हें अब भी मिलेगी छूट
ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. अरुणेन्द्र शुक्ला ने बताया कि रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष कलेक्टर के निर्देश पर जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए भी ट्रांसफ्यूजन शुल्क लागू किया गया है। लेकिन आयुष्मान कार्डधारी, दीनदयाल गरीबी रेखा कार्डधारी, थेलेसीमिया और रक्तात्पता वाले मरीजों को अभी भी छूट दी जा रही है। रसीद उनकी भी काटी जाती है, लेकिन शुल्क नहीं लिया जाता है। वहीं, किसी जरूरतमंद या गरीब को कलेक्टर, सीएमएचओ और सिविलसर्जन के लिखे जाने पर भी छूट मिल सकती है।

रक्त हर वक्त परिवार की पहल पर मिली थी छूट
छतरपुर शहर के युवा जरूरतमंद गरीबों, मरीजों, थैलेसिमिया पीडि़त बच्चों व मरीजों के लिए रक्त दान के लिए रक्त हर वक्त परिवार नाम से ग्रुप बनाए हैं, जो जरूरतमंदों को ब्लड उपलब्ध कराने से लेकर, रक्तदान के लिए लोगों को प्रेरित करने और रक्तदान शिविर आयोजित कर ब्लड बैंक में ब्लड यूनिट बढ़ाने के काम पूरे साल करते हैं। ग्रुप के युवा अंकित अग्रवाल बताते हैं कि जिला अस्पताल में आने वाले एनिमिक गरीब बच्चों व मरीजों को एक बार में 4 से 6 यूनिट ब्लड लगता है। जिसमें सिर्फ ट्रांसफ्यूजन चार्ज लेने पर उन्हें हर महीने 4 से 6 हजार रुपए का खर्च आता है। इसी समस्या को विश्व रक्तदान दिवस पर तात्कालीन कलेक्टर रमेश भंडारी के सामने रखने पर उन्होंने जिला अस्पताल में इलाजरत मरीजों के लिए शुल्क में छूट दी थी। लेकिन अब फीस लगेगी तो गरीबों के लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी।

जिला अस्पताल में रोजाना 50 से 60 यूनिट ब्लड की जरूरत
जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए ही रोजाना 50 से 60 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। जिला अस्पताल परिसर में 300 यूनिट का जिले का एक मात्र ब्लड बैंक संचालित हैं। लेकिन जनवरी माह में ब्लड बैंक में 17 से 30 यूनिट तक ही उपलब्ध रही हैं। ऐसे में ज्यादातर मरीज परिजनों के ब्लड एक्सेंज पर ही निर्भर हैं। नई फीस लगने से रोजाना 50 से 60 मरीजों को ये फीस भरनी होगी। जिसमें से 90 फीसदी मरीज तो ग्रामीण व गरीब परिवारों से आते है। उनके लिए ये फीस मुसीबत का सबब बन सकती है।

ब्लड बैंक में ग्रुपों की कमी भी
बैंक में कुछ ब्लड ग्रुप पूरी तरह से खत्म हो जाने के कारण गंभीर मरीज के परिजन ब्लड डोनेट करने के बाद भी एक्सचेंज नहीं कर पा रहे हैं। पिछले दिनों रामगढ़ के पप्पू कुशवाहा की तबियत बिगडऩे पर डॉक्टर ने उन्हें बी-पॉजिटिव ब्लड लगवाने की सलाह दी। इसके बाद मरीज के परिजन जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक पहुंचे और ओ-पॉजिटिव के बदले में बी-पॉजिटिव ब्लड एक्सचेंज करने को कहा। पर ब्लड बैंक में बी-पॉजिटिव ब्लड ग्रुप न होने के कारण उन्हें पूरे दो दिन तक इंतजार करते हुए परेशान होना पड़ा। इस दौरान शहर के समाजसेवी युवक ने बी-पॉजिटिव ब्लड दान कर मरीज की जान बचाई।

फैक्ट फाइल
ब्लड बैंक में उपलब्ध ब्लड ग्रुप की संख्या
एबी-पॉजिटिव 00
एबी-निगेटिव 00
बी-पॉजिटिव 01
बी-निगेटिव 01
ओ-पॉजिटिव 05
ओ-निगेटिव 02
ए-पॉजिटिव 20
ए-निगेटिव 01

निर्देशानुसार ले रहे फीस
इन हाउस मरीजों के लिए ट्रांसफ्यूजन फीस लागू की गई है। निर्देशानुसार फीस की रसीद दी जा रही है। हालांकि आयुष्मान, दीनदयालय व थेलेसीमिया के मरीजों के लिए छूट अभी भी जारी है।
डॉ. अरुणेन्द्र शुक्ला, ब्लड बैंक प्रभारी