
बांध का विकल्प बनेगा केन-बेतवा का ढोढऩ बांध
छतरपुर. केन नदी पर 113 साल पहले 1909 में अंग्रेजो का बनवाया गंगऊ बांध छलकने लगा है। गंगऊ बांध का पानी क्रस्टवॉल से ऊपर फ्लो हो रहा है, जो बरियापुर बांध के रास्ते केन नदीं में पहुंचकर जल स्तर बढ़ा रहा है। अंग्रेजों द्वारा बनाए गए गंगऊ डेम के विकल्प के रूप में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट तैयार होगा। इसके तहत एक ही डेम का निर्माण किया जाना है। केन नदी पर बनने वाला यह डेम गंगऊ से अपर रीजन में एक किलोमीटर दूर ढोढऩ गांव में बन रहा है। 113 साल पहले बना यह डेम एक रिजर्वायर है। फिलहाल डेम से पानी छोड़ा जा रहा है, यह केन नदी पर ही डाउन स्ट्रीम में बने बरियारपुर बांध पहुंच रहा है। जहां से छतरपुर, पन्ना और उप्र के बांदा जिले में नहरों की मदद से खेतों तक पहुंचाया जाएगा।
गंगऊ का विकल्प है केन बेतवा लिंक प्रोजेक्ट
लिंक प्रोजेक्ट के तहत केन नदी पर बनने वाले डोढन बांध से नहर निकलेगी जो बेतवा नदी में मिल जाएगी। इससे छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना जिले के 3.96 लाख हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश के महोबा, बांदा और झांसी जिले के 2.65 लाख हेक्टेयर हिस्से पर सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी। केन बेतवा प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण और वन विभाग की स्वीकृति मिल गई है। 113 साल पहले बनाया गया गंगऊ बांध उप्र सिंचाई विभाग के अधीन है। लेकिन अधिक उम्र का होने के कारण अब यह बांध डेड घोषित हो चुका है। इसी के कारण इस बांध के विकल्प के रूप में नए बांध का निर्माण जरूरी है।
गंगऊ से केन नदीं में छलकता है 11990 क्यूसेक पानी
बारिश से गंगऊ और बरियारपुर बांधों के जलस्तर में इजाफा हुआ है। ये डेड स्टोर की स्थिति में थे। हालांकि बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं। गंगऊ वियर की क्रस्टवाल के ऊपर से 11990 क्यूसेक पानी उफनाकर केन नदी में गिरता रहा। इसी तरह बरियारपुर में क्रस्टवाल से 7150 क्यूसेक पानी केन नदी में डिस्चार्ज हो रहा है। सिंचाई विभाग ने मुख्य केन नहर चालू कर दी है। साथ ही अतर्रा और बांदा ब्रांचों में भी पानी छोड़ दिया है। मुख्य केन नहर में 2300 क्यूसेक, अतर्रा ब्रांच में 1350 क्यूसेक और बांदा ब्रांच में 433 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
इधर, लहचूरा डैम के 11 फाटक खुले
एमपी-यूपी सीमा पर हरपालपुर के पास स्थित धसान नदी का जल स्तर बढ़ गया है। सुजारा से पानी छोड़े जाने के चलते नदी में बान सुजारा बांध का पानी छोडऩे के कारण सरसेड़, चपरन गांव में नदी किनारे स्थित खेत पानी में डूब गए। वहीं, लहचूरा डैम में क्षमता से अधिक पानी भर गया, जिस कारण सिंचाई विभाग महोबा के अधिकारियों द्वारा डैम के 17 में 11 फाटक एक-एक कर खोलते हुए 50 हज़ार क्यूबिक पानी छोड़ा।
Published on:
17 Aug 2022 05:30 pm
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