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कर्ज माफी की आस में 262 करोड़ का पुराना कर्जा नहीं चुकाया, 30 हजार किसान हो गए डिफाल्टर

330 करोड़ का वर्तमान रबी-खरीफ फसल का ऋण भी किसानों पर, 60 करोड़ ही चुकाए2018 में माफ हुए थे 170 करोड़, चुनावी साल में फिर से कर्ज माफी की आस में किसान

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छतरपुर. चुनावी वर्ष में कर्जमाफी के वादे, उम्मीद और किसान फिर से चर्चा का विषय बन गए हैं। जिले के 50 हजार किसानों ने जिला सहकारी बैंक से 592 करोड़ का ऋण ले रखा है, जिसमें से 262 करोड़ का ऋण लेने वाले 30 हजार किसान डिफाल्टर हो गए हैं। वहीं, 330 करोड़ का चालू ऋण लेने वाले किसान ऋण चुका रहे हैं, लेकिन उनकी रफ्तार भी धीमी है, अब तक केवल 60 करोड़ रुपए ही किसानों ने लौटाए हैं। ज्यादातर किसान चुनावी साल में कर्ज माफी की आस लगाए बैठे हैं। ऐसे में पुराना कर्ज न चुकाने वाले 30 हजार किसान बैंक की तरह से डिफाल्टर मान लिए गए हैं। अगर ऋण माफी होती है, तो किसानों को राहत मिलेगी, अन्यथा डिफाल्टर किसान समितियों से मिलने वाली सहायता से वंचित हो सकते हैं।


रबी व खरीफ फसल के लिए इसी साल लिया ऋण
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक अंतर्गत संचालित शाखाओं के माध्यम से किसानों को जीरो फीसदी ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के 55 से 60 हजार किसानों पर 592 करोड़ रूपए बकाया हैं जिसमें से 330 करोड़ चालू ऋण है और 262 करोड़ डिफाल्टर ऋण है। जिले के 50 फीसदी किसानों पर कर्ज बकाया है। आंकड़े बताते हैं कि 318 करोड़ रूपए रबी और खरीफ फसलों के लिए सहकारी समितियों में दर्ज किसानों को ऋण दिया गया था जिसमें से 249.53 करोड़ रूपए खरीफ की फसल के लिए दिया गया। महत्वपूर्ण बात ये है कि वर्तमान समय चुनावी साल है इसलिए किसान इस आस में बैठे हैं कि कोई राजनैतिक दल कर्ज माफी की घोषणा करेगा और उसके सत्ता में आने पर किसानों का कर्ज माफ हो जाएगा। कर्जमाफी की आस के कारण किसान ऋण जमा करने से कतरा रहे हैं। हालांकि वर्तमान 2022-23 वित्तीय वर्ष में सिर्फ 60 करोड़ की राशि वसूल की गई है। इनमें वे किसान शामिल हैं जो नियमित रूप से ऋण लेकर समय पर राशि चुकाते हैं तभी उन्हें जीरो फीसदी ब्याज का लाभ मिल पाता है।

सीएम ने की ब्याज माफी की घोषणा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान घोषणा कर चुके हैं कि जीरो फीसदी ब्याज पर लिए गए ऋण को समय पर न चुकाने की स्थिति में जो ब्याज मूल रकम में जोड़ा गया है उसे माफ कर दिया जाएगा। हालांकि यह अभी सिर्फ घोषणा है। सहकारी बैंकों तक लिखित में ब्याज माफी के संबंध में कोई आदेश नहीं पहुंचे हैं।

किसानों का ये कहना है
रामस्वरुप राजपूत का कहना है कि पूर्व की कर्जमाफी में कर्जा लौटाने वाले किसानों को लाभ नही मिल पाया था। इसलिए किसान चुनावी साल में कर्जमाफी का इंतजार कर रहे हैं। ताकि कर्जा माफी का लाभ उन्हें भी मिल सके। किसान देवी सिंह का कहना है कि पिछली बार कर्ज चुकाने के बाद कर्जमाफी की घोषणा हुई थी। ऐसे में कर्जमाफी का लाभ नहीं मिल पाया था। किसान गणेश कुशवाहा का कहना है इंतजार करने में क्या परेशानी है, शायद कर्ज माफी का लाभ मिल जाए।

2018 में माफ हुआ था 170 करोड़
कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में सिर्फ 170 करोड़ रूपए माफ हो सका था। 15 महीने की सरकार के जाते ही ऋण माफी की प्रक्रिया को विराम लग गया। इसका लाभ सिर्फ उन्हीं लोगों को हुआ जिनके पहले चरण में कर्जमाफी में नाम आए थे। सेवा सहकारी समितियों सहित अन्य बैंकों से ऋण लेने वाले वे किसान जिनका कर्ज 50 हजार रूपए था उन्हें इसका लाभ मिला। हालांकि कमलनाथ सरकार ने दो लाख रूपए तक के ऋण को माफ किए जाने की घोषणा की थी मगर सरकार के जाते ही उसकी घोषणाएं पर अमल नहीं हो सका।

इनका कहना है
जिलेे के करीब 30 हजार किसान डिफाल्टर हैं। किसानों से लगातार ऋण चुकाने के लिए संपर्क किया जा रहा है। ब्याज माफी के संबंध में लिखित आदेश आते ही कार्य किया जाएगा।
रामविशाल पटैरिया, महाप्रबंधक, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक छतरपुर

फोटो- सीएचपी२००३२३-71- जिला सहकारी बैंक