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हर साल बढ़ रहा कुपोषण, एक वर्ष में दर्ज हुए 800 से अधिक बच्चे, जागरूकता की कमी बन रही कारण

गर्भावस्था के दौरान खानपान में कमी और खून की रिक्तता की वजह से प्रतिवर्ष कुपोषित होने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है।

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अस्पताल में भर्ती बच्चे

जिले मेे कुपोषण प्रति वर्ष अपने पैर पसार रहा है और बीते साल की तुलना वर्ष 2025 में 800 से अधिक बच्चे कुपोषित पाए गए। जबकि पिछले वर्ष यह आंकडा 500 था। इसका मतलब है कि सरकार द्वारा कुपोषण को दूर करने कई तरह के प्रयास तो किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर इन प्रयासों का कोई असर होते नहीं दिख रहा है। जिला अस्पताल के एनआरसी वार्ड में बच्चों की देखभाल की जा रही है जिससे करीब सात सौ से अधिक बच्चों को स्वस्थ करके घर भेजा गया है।गर्भावस्था के दौरान खानपान में कमी और खून की रिक्तता की वजह से प्रतिवर्ष कुपोषित होने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। गर्भावस्था के दौरान से ही सरकार जननी को पोषित रहने के लिए कई योजनाएं और आयाम स्थापित क रही है। इसके बावजूद भी जिले में एक माह से लेकर 5 वर्ष तक के बच्चे कुपोषण की गिरफ्त में बच्चे हैं।

बढ़ रहे आंकड़े

छतरपुर जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केन्द्र (एनआरसी) के अनुसार अप्रैल 2024 से 2025 तक 830 बच्चे कुपोषण के खिलाफ जंग जीतकर स्वस्थ हुए हैं। जबकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष पांच सौ था। इसका मतलब कि सरकार द्वारा तो प्रयास किया जा रहा, लेकिन कई जगह ऐसी हैं जहां जागरुकता की कमी से कुपोषण के मामले जिले में बढ़ रहे हैं।

जागरुकता की कमी

पोषण पुनर्वास केंद्र की प्रभारी डॉ. कविता तिवारी का कहना है कि बुंदेलखंड ग्रामीण रूप से अभी भी शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। सरकार द्वारा जो भी अनुक्रम चलाए जा रहे हैं उनसे बाद भी गर्भावस्था के समय कौन-कौन सी सवाधानियां बरतनी होती है उसके लिए कई मिथ बने हुुए हैं। वहीं जन्म के बाद जब बच्चा बढ़ा होता है या फिर उसके स्वास्थ्य पर कोई विपरीत असर होता है तो उसे चिकित्सक की जगह झाडफूंक करवाते हैं। लोगों को समझना बहुत जरुरी है कि वे बच्चों में कमजोरी दिखने पर तुरंत आंगनबाड़ी से संपर्क करें।

सी-सेम कार्यक्रम के आधार पर जांच

आकांक्षी जिलों में शामिल छतरपुर में सी-सेम कार्यक्रम चल रहा हैं। जिसके तहत शून्य से पांच वर्ष के बच्चों का लंबाई, चौड़ाई और वजन के आधार पर स्तर पर तय किया जाता हैं। सी-सेम के तहत पहले बच्चों के भूख की जांच की होती हैं। इसके बाद अन्य मेडिकल जांच होती हैं। तीन में से एक जांच में भी फेल होने पर उसे अति कुपोषित की श्रेणी में रखा जाता हैं और सीधे एनआरसी रेफर किया जाता हैं।ऐसे माप रहे कुपोषणएनआरसी में तीन चरणों में कुपोषण को मापा जा रहा है। एक माह से पांच वर्ष के बच्चों के लिए प्रथम चरण में उनकी आयु के आधार पर वजन और लंबाई कितनी है उस आधार पर जांच, दूसरा उनके शरीर में सूजन लगातार है तो उससे कुपोषण की श्रेणी परखी जाती है। इसके अलावा तीसरे और अंतिम चरण में एनिमेसी टेप से बच्चे की मसल्स को नापते हैं।

प्रतिवर्ष कुपोषण के मामले

वर्ष संख्या

2021-22- 344

2022-23- 407

2023-24- 511

2024-25- 830