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फर्जी बिलों और कैश बुक के जरिए नगर परिषद में 5.5 करोड़ का घोटाला

जांच टीम ने इस बात का खुलासा किया है कि तत्कालीन सीएमओ और लेखापाल ने फर्जी बिलों और कैश बुक में फर्जीवाड़ा कर सरकारी रकम की बंदरबांट की है। आरोप है कि सीएमओ और लेखापाल ने सामग्री सप्लायर को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किया है।

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बारीगढ़ नगर परिषद

छतरपुर. जिले के नगर परिषद बारीगढ़ में जिला स्तरीय टीम की जांच में 5.50 करोड़ का घोटाला उजागर होने के बाद भी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। इसके चलते नगर परिषद के तत्कालीन सीएमओ श्रवण कुमार द्विवेदी और लेखापाल महगू रैकवार के खिलाफ 9 माह पहले कार्रवाई का प्रस्ताव भेजे जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है।

जांच टीम का खुलासा

जांच टीम ने इस बात का खुलासा किया है कि तत्कालीन सीएमओ और लेखापाल ने फर्जी बिलों और कैश बुक में फर्जीवाड़ा कर सरकारी रकम की बंदरबांट की है। आरोप है कि सीएमओ और लेखापाल ने सामग्री सप्लायर को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किया है। इतना ही नहीं, जांच में पाया गया है कि तत्कालीन अफसरों के द्वारा निविदा प्रक्रिया का पालन किए बगैर संविदाकारों की मिलीभगत सरकारी रकम का गबन किया है। जांच में गंभीर वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर कलेक्टर ने तत्कालीन सीएमओ और लेखापाल के खिलाफ कार्रवाई के लिए नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव और आयुक्त समेत आयुक्त कोष लेखा को पत्र भेजा था।

चार सदस्यीय टीम ने जब्त किया था रिकॉर्ड


कलेक्टर संदीप जीआर के निर्देश पर तात्कालीन अपर कलेक्टर नम: शिवाय अरजरिया, कोषालय अधिकारी विनोद श्रीवास्तव, लवकुशनगर की तत्कालीन एसडीएम निशा बांगरे और डिप्टी कलेक्टर राहुल सिलाडिय़ा ने बारीगढ़ नगर परिषद की जांच करते हुए रिकॉर्ड जब्त किए थे। जांच टीम के द्वारा बारीकी से रिकॉर्डों की जांच किए जाने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। कोषालय अधिकारी द्वारा किए गए रिकॉडों के परीक्षण से यह बात सामने आई है कि तत्कालीन सीएमओ और लेखापाल ने फर्मों से साठगांठ कर सरकारी रकम को ठिकाने लगाया है।

वित्तीय नियमों के विरुद्ध

जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं कि बगैर वर्क ऑर्डर पारस इलेक्ट्रिकल छतरपुर को 20 लाख से अधिक का भुगतान किया गया है। इसके साथ ही दुर्गा इलेक्ट्रॉनिक और राज केमिकल्स छतरपुर समेत भवन ठेकेदार राजेन्द्र कुमार चौरसिया को सामग्री के गुणवत्ता परीक्षण के बिना 85 लाख 89 हजार 240 रुपए का अवैध तरीके से भुगतान किया जाना पाया गया था। टीम ने जांच में पाया था कि वित्तीय नियमों के विरुद्ध तत्कालीन सीएमओ और लेखापाल निकाय को वित्तीय हानि पहुंचाई है।

पार्क की 50 लाख की राशि का बंदरबांट


नगर परिषद बारीगढ़ में फूला पार्क के निर्माण के लिए 50 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। टीम ने पार्क का भौतिक सत्यापन में पाया पार्क जीर्ण अवस्था में है। तत्कालीन सीएमओ ने 9 लाख से अधिक सामग्री तो क्रय की है, लेकिन अभी पार्क में स्थापित नहीं हो पाई है। इसके साथ ही पार्क की स्वीकृति राशि 40 लाख 33 हजार का उपयोग अन्य योजनाओं में खर्च करके वित्तीय अनियमितता की थी।

बगैर रजिस्टर्ड फर्मों से की गई सामग्री की खरीदी


नगर परिषद की जांच में यह पाया गया है कि है कि तत्कालीन सीएमओ ने शिव और वारिश फर्नीचर से 4 लाख 98 हजार की खरीदी की गई है। जांच में यह फर्म अन रजिस्टर्ड पाए जाने के साथ बगैर जीएसटी देयक के फर्म संचालकों को भुगतान कर शासन को वित्तीय हानि पहुंचाए जाने का खुलासा हुआ है। आरोप है कि फर्म एवं सीएमओ की मिलीभगत से निकाय को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है।

इनका कहना है


बारीगढ़ में सरकारी राशि के वित्तीय अनियमितता का मामला आपके माध्यम से संज्ञान में आया। यदि छतरपुर प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भेजा है तो ऑफिस में देखकर दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
भरत यादव, आयुक्त, नगरीय प्रशासन