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एक ऐसा सरकारी अस्पताल, जहां रात काटने मरीजों को अदा करना पड़ रहा किराया

मरीज व परिजन बेहाल, किराए से कंबल व गद्दे लेने को मजबूर, रूम हीटर का भी अभाव

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एक ऐसा सरकारी अस्पताल, जहां रात काटने मरीजों को अदा करना पड़ रहा किराया

एक ऐसा सरकारी अस्पताल, जहां रात काटने मरीजों को अदा करना पड़ रहा किराया

छतरपुर। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं तो पटरी आ नहीं पा रही हैं साथ ही मरीजों को अव्यवस्थाओं से भी जूझना पड़ रहा है। ठंड के मद्देनजर इस बार मरीजों व उनके परिजनों के लिए पर्याप्त कंबलों की व्यवस्था नहीं की गई। जिसके चलते मरीजों व परिजनों को नकद रुपए जमा करा कर टेंट से किराए पर रजाई आदि लाना मजबूरी बन गया है। बावजूद इसके जिला अस्पताल का प्रबंधन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा रहा है।
जिला अस्पताल छतरपुर में सिर्फ छतरपुर जिले ही नहीं टीकमगढ़, पन्ना, यूपी के महोबा, बांदा आदि जिलों से इलाज के लिए मरीज आते हैं। बाजवूद इसके अधिकांश मरीजों को सर्दी से बचाव के लिए कंबल नहीं मिल पा रहा है। गलन भरी सर्दी के बीच ठंड से ठिठुरते मरीज व उनके परिजन टेंट से किराए पर रजाई आदि लाने को मजबूर हैं। वहीं जिला अस्पताल प्रबंधन मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का ढिढोरा तो पीटता है लेकिन सुविधाओं की हकीकत जिला अस्पताल में भर्ती मरीज स्वयं बयान कर रहे हैं। तीन दिन पहले बकरियों के लिए पत्ती तोड़ते समय पेड़ से गिर कर संतोष प्रजापति निवासी बिजावर घायल हुए थे। उनका जिला अस्पताल में इलाज किया जा रहा है लेकिन संतोष को जिला अस्पताल से कंबल नहीं मिला। यह समस्या अन्य मरीजों के साथ भी है। सर्दी से बचने के लिए मरीजों के परिजन २५ रुपए प्रति दिन के हिसाब से टेंट से रजाई लाने को मजबूर हैं।
केस-एक
बमीठा थाना क्षेत्र जटापहाड़ी गांव निवासी राजेश ने बताया कि उसके दादा सुकइयां अहिरवार (९५) को पेट में जलन की शिकायत होने पर इलाज के लिए शनिवार को जिला अस्पताल लाया गया था। भर्ती होने के बाद इलाज शुरू किया गया। हालत ज्यादा खराब होने पर वह सिर्फ एक कंबल ही लाए थे। यहां पर स्टाफ से मरीज को ओढऩे के लिए कंबल मांगा गया। तब स्टाफ द्वारा कंबल न होने की बात कही गई। तब अस्पताल के मौजूद लोगों से जानकारी ली तो पता चला कि पास में ही स्थित टेंट हाऊस से गर्म रजाई व गद्दा मिलेगा। इसके बाद टैंट हाऊस में जाकर किराए पर दो रजाई ले आए हैं। जिला अस्पताल में कम से कम इतनी तो व्यवस्था होने की चाहिए कि सभी को सर्दी से बचाव के लिए गर्म कंबल मिल सकें। यहां रूम हीटर भी व्यवस्था नहीं है। जिससे मरीजों की सर्दी में हालत खराब है। इस समय भीषण सर्दी पड़ रही है। शाम होते ही सर्दी के कारण हालत खराब होने लगती है।
केस दो-
महोबा जिले के खन्ना थाना क्षेत्र अंतर्गत सिरसीकलां गांव निवासी ओमप्रकाश (२९) पिता बिंदाप्रसाद गोस्वामी को फेफड़ों में मवाद होने की शिकायत पर परिजनों द्वारा उसे तीन जनवरी जिला अस्पताल छतरपुर में लाया गया था। डॉक्टर ने उसका चार जनवरी को ऑपरेशन किया। इसके बाद उसे मेल वार्ड में भर्ती कर लिया गया। स्टाफ से ओढऩे व बिछाने के लिए कंबल व चादर आदि मांगा गया था। तब स्टाफ द्वारा कंबल नहीं दिया गया। जिसके बाद एक दिन तो उन्हें टेंट की रजाई व चादर से काम चलाना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अपने घर से कंबल आदि मांग लिया। बिंदा प्रसाद ने बताया कि घर में सुना था कि जिला अस्पताल छतरपुर में मरीजों का बेहतर इलाज किया जाता है और व्यवस्थाएं भी बेहतर हैं लेकिन जब यहां आए तो पता चला कि यहां तो कोई ध्यान नहीं देने वाला भी नहीं हैं। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। कम से कम ठंड तो मरीजों व मरीजों के परिजनों के लिए कंबल आदि की उचित व्यवस्था होना चाहिए।
इनका कहना
मैंने वार्ड प्रभारियों को दस-दस अतिरिक्त कंबल वार्ड में रखने के निर्देश दिए हैं। यदि स्टाफ द्वारा मरीजों को कंबल देने में किसी भी प्रकार की लापरवाही की जा रही है तो कार्रवाई की जाएगी। मरीजों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
डॉ. एसके चौरसिया, सिविल सर्जन जिला अस्पताल छतरपुर