17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इतिहास और धर्म को समेटे हुए है अचट्ट गांव

गांव में मौजूद है 11वीं सदी की पुरातात्विक धरोहरखेतों की खुदाई में मिलते हैं इमारतों के अवशेषहमारी विरासत

2 min read
Google source verification
 गांव में मौजूद है 11वीं सदी की पुरातात्विक धरोहर

गांव में मौजूद है 11वीं सदी की पुरातात्विक धरोहर

छतरपुर। जिले के अनेक ग्राम पुरातात्विक धरोहर से सम्पन्न हैं। इन गांवों में आज भी प्राचीन धर्म, कला और संस्कृति की छाप देखने को मिलती है। पुरातात्विक महत्व होने के बाद भी सरकारी उदासीनता के कारण ये गांव और यह प्राचीन धरोहर उपेक्षित पड़ी है। इन्हीं में से एक गांव है अचट्ट। नौगांव और ईशानगर के बीच मौजूद इस गांव में धर्म और इतिहास से जुड़ीं कई निशानियां मौजूद हैं। गांव में खेतों में खुदाई शुरू करते ही कई मूर्तियां मिलने लगती हैं। पुरातत्व सम्पदा सम्पन्न होने के बावजूद इस गांव की तरफ न तो पुरातत्व विभाग का ध्यान है और न ही जिला प्रशासन इनकी सुध ले रहा है।

चंदेलकालीन विष्णु मूर्ति जो मन मोह लेती है
ग्राम अचट्ट में एक प्राचीन मंदिर मौजूद है जहां भगवान विष्णु की लगभग 5 से 6 फीट ऊंची प्रतिमा है। अपने तरह की एक अलग कारीगरी के साथ इस प्रतिमा का निर्माण किया गया है। प्रतिमा चंदेलकालीन बताई जाती है। पत्थर से निर्मित भगवान विष्णु खड़ी हुई अवस्था में प्रचुर ज्योति युक्त बड़े नेत्रों के साथ दिखाई पड़ते हैं। प्रतिमा को देखकर ही इसकी भव्यता और इसके धार्मिक महत्व को महसूस किया जा सकता है। इसी तरह गांव में एक सहस्त्र मुखी शिवलिंग मौजूद है। आमतौर पर सहस्त्र मुख वाले शिवलिंग चंदेलकाल के बताए जाते हैं। उक्त दोनों ही प्रतिमाएं जमीन की खुदाई से बाहर निकली थीं। यहां रहने वाले शिवनारायण तिवारी बताते हैं कि भगवान विष्णु का ही एक नाम अच्छित है इन्हीं के नाम पर कभी यह क्षेत्र अच्छितनगर हुआ करता था जो बाद में अपभ्रंश होते हुए अचट्ट हो गया।

खेतों की खुदाई में मिलते हैं इमारतों के अवशेष
अचट्ट गांव में आज भी 10 से 15 फीट की खुदाई पर ही मलबे के रूप में मिट्टी की जगह पुरानी ईंटें मिलने लगती हैं। यहां के एक किसान शिवदीन यादव बताते हैं कि उनके खेत में अब तक खुदाई में कई छोटी-बड़ी खण्डित मूर्तियां मिल चुकी हैं। एक प्रतिमा मां अंजनी और बाल हनुमान की है जिसमें लेटी हुई अवस्था में दोनों प्रतीत हो रहे हैं। शिवदीन बताते हैं कि मूर्तियां मिलना हमारे गांव में एक सामान्य बात हो गई है। अब तक कई प्राचीन मूर्तियां यहां मिल चुकी हैं। कुछ मूर्तियों को गांव के मंदिर में रखा गया है तो वहीं कुछ मूर्तियां चोरी चली गईं।

सुरंग वाला कुआं और बैजनाथ तालाब
गांव में एक खेत की खुदाई के दौरान जब एक स्थान पर मिट्टी ज्यादा धसक गई तो वहां से मलबा हटाया गया। इस स्थान पर ग्रामीणों को एक ऐसा कुआं मिला जिसमें नीचे के तरफ एक सुरंग मौजूद थी। वक्त के साथ सुरंग भीतर से मलबे मेंधंस गई है लेकिन कुएं के नीचे अब भी उसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। गांव में एक बैजनाथ तालाब भी मौजूद है। यहां रहने वाले प्रेमनारायण अवस्थी बताते हैं कि ऐसी मान्यता है कि त्वचा रोग से जूझ रहे लोग इस तालाब में स्नान करने के बाद ठीक हो जाते हैं।

इनका कहना है
अचट्ट भगवान विष्णु के नाम अच्छित पर पड़ा है। यहां मौजूद भगवान विष्णु की प्रतिमा और कई अन्य पुरातात्विक सम्पदा 11वीं और 12वीं सदी के अवशेष हैं। इस दिशा में पुरातत्व विभाग और सरकार को काम करना चाहिए ताकि हमारी प्राचीन धरोहर को बचाया जा सके।
प्रो. सीएम शुक्ला, छतरपुर जिले के इतिहास में पीएचडी