
बच्चे को मां को सौंपते चिकित्सक व मेडिकल स्टाफ
शहर के सीताराम कॉलोनी निवासी रीता और पंकज त्रिवेदी के घर खुशियों की बहार लौट आई है। उनके नवजात बेटे शिवा ने 67 दिनों तक संघर्ष करने के बाद आखिरकार स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया और घर लौट आया। यह एक चमत्कारी सफर रहा, जिसमें जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ की सतर्कता और मेहनत ने एक नन्हीं जान को नया जीवन दिया। रीता ने 27 जनवरी 2025 को शाम 7 बजे अपने बेटे को जन्म दिया। लेकिन जन्म के समय, बच्चा अत्यधिक कमजोर था और उसका वजन मात्र 900 ग्राम था। नवजात की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उसी दिन शाम 7.30 बजे उसे जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती किया गया।
बच्चे की जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने तुरंत उसे कृत्रिम सांस के सहारे सर्फेक्टेंट दिया और सी-पेप मशीन में रखकर उपचार शुरू किया। इस दौरान नवजात ने कई बार सांस लेना बंद कर दिया, लेकिन अनुभवी मेडिकल टीम की तत्परता और पुनर्जीवन तकनीकों की मदद से हर बार उसकी जान बचा ली गई। इस कठिन प्रक्रिया में दो बार बच्चे को ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी दिया गया, जिससे उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। बच्चे की आंखों की विशेष जांच कराई गई और जैसे-जैसे उसकी स्थिति में सुधार होता गया, उसे मां का दूध और केएमसी (कंगारू मदर केयर) थेरेपी भी दी गई। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप, बच्चे का वजन धीरे-धीरे बढकऱ 2 किलो तक पहुंच गया।
67 दिनों की अथक चिकित्सा देखभाल के बाद नवजात को पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर दिया गया और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। बच्चे के घर लौटने पर माता-पिता और पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। इस उपचार से लगभग 15 से 20 लाख रुपए की बचत भी हुई, जो निजी अस्पतालों में खर्च हो सकते थे। परिवार ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों का धन्यवाद किया और उनकी इस उपलब्धि को एक वरदान माना। शिवा के घर लौटने से घर में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है और माता-पिता के चेहरे पर संतोष और आभार झलक रहा है।
Published on:
05 Apr 2025 10:29 am
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