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एक दशक बाद जिले को सालभर में तीन बार मिलेगा 1957 में बने रनगुंवा बांध से पानी

वर्ष 2009 के बाद पहली बार बांध में 57 फीसदी जलभरावयूपी को 70 और एमपी के किसानों को मिलेगा 30 फीसदी पानी

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केन नहर के जरिए मिलेगा पानी

केन नहर के जरिए मिलेगा पानी

छतरपुर. वर्ष 1957 में मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश के संयुक्त प्रयास से बना छतरपुर जिले का रनगुंवा बांध 2009 के बाद पहली बार 57 फीसदी तक भर गया है। इस साल जिले में औसत बारिश का आंकड़ा 35.1 इंच तक पहुंच गया है। इसके साथ ही जिले के बाधों में जलभराव भी पहले से बेहतर हुआ है। रनगुंवा बांध में इस बार 57 फीसदी जलभराव होने से मध्यप्रदेश के हिस्से में मिलने वाले 30 फीसदी पानी और उत्तरप्रदेश के हिस्से में मिलने वाले 70 फीसदी पानी से किसानों को साल में तीन बार सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा।

केन नहर के जरिए मिलेगा पानी
रबी की फसल के लिए रनगुंवा बांध से नवंबर में केन नहर के माध्यम से बुंदेलखंड में सिंचाई के पानी लिए छोड़ा जाता है। इस बार करीब 12 साल बाद रनगवां बांध में इतना पानी एकत्र कर लिया गया है कि कम से कम तीन बार फसलों की सिंचाई आसानी से हो जाएगी। चार साल से रनगवां बांध में पानी कुल क्षमता का 25 से 30 फीसदी तक ही एकत्र हो पाता रहा है। करीब 70 फीसदी तक पानी की कमी ही रही। इसलिए रबी की फसल को सिर्फ एक बार ही पानी मिल पाता रहा है। फसलों को कम पानी मिलने के चलते पैदावार लगातार प्रभावित रही है।

इधर, बानसुजारा से फिर छोड़ा गया पानी
दो दिन से लगातार हो रही बारिश के कारण धसान नदी पर बने बानसुजारा बांध के 4 गेट खोलकर 10 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है जिससे धसान नदी का जल स्तर बढ़ गया है। यह पानी पहाड़ी बांध होते हुए बुधवार की शाम लहचूरा बांध तक पहुंच गया। सुरक्षा की दृष्टि से लहचूरा बांध के आवश्यकतानुसार फाटक खोलकर 20 हजार से 50 हजार क्यूसेक तक पानी की निकासी की जा रही है। जिला प्रशासन ने नदी के आसपास स्थित रहवासी क्षेत्रों के नागरिकों से सतर्क रहने का आग्रह किया है। अभी लहचूरा बांध पूर्ण जलस्तर तक भरा हुआ है तथा वर्तमान में बांध के 5 गेटों को 1.5 मीटर ऊंचाई से खोलकर 38 हजार क्यूसेक पानी धसान नदी मे सुरक्षित रूप से छोड़ा जा रहा है।