छतरपुर. शहर के अंदर और बाहर में जगल क्षेत्र भी है और वन सम्पदा व जानवरों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की ओर से तार फैंसिंग कराई जाती है। इससे वन क्षेत्र के अंदर के जानवर की सुरक्षा के साथ ही बाहरी लोगों को अंदर जाने से रोका जा सके। लेकिन विभाग की लापरवाही के चलते वन क्षेत्र में बे-रोकटोक लोगों को आना जाना है। ऐसे में वन सम्पदा को नुकसान पहुुंचाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार शहर के बीचों बीच स्थित हनुमान टौरिया और इससे जुड़ी पहाड़ी वन क्षेत्र में आती है। यहां पर बंदर, सियार सहित जंगली जानवर रहते हैं और इसके लिए पहाड़ी को तार फैंसिंग से कवडऱ् किया गया था। जिससे यहां रहने वाले जानवरों और बाहरी लोगों की एक दूसरे से सुरक्षा हो सके। लेकिन विभाग की लापरवाही से यहां पर लगाए गए तोर टूटने लग हैं और लोगों को वन क्षेत्र में आना जाना होते लगा है। इसी तरह आरटीओ कार्यालय से लगी पहाड़ी में भी जंगल में रहने वाले जानवरों की सुरक्षा के लिए विभाग की ओर से की गई तार फैंसिंग टूटने से अब लोगों का आना जाना आसानी से हो रहा है। यहां पर हर रोज लोग लकडिय़ां एकत्र कर बाहर ले जा रहे हैं।
इसी के सामने स्थित वन विभाग का काष्ठागार है और यह काफी बड़ा वन क्षेत्र है। पहले इस वन क्षेत्र में कई औशधियों की खेती की जाती थी। लेकिन बीते करीब १० वर्ष से बंद है और यहां पर हाइवे के किनारे से रेंज कार्यालय, काष्ठागार और कर्मचारियों के आवास बने हुए हैं। इस जंगल के बीच से फोरलेन हाइवे में गुजरने के बाद से यहां पर बाहरी लोगों को आवागमन अधिक हो गया है। हाइवे बनने के बाद विभाग की ओर अभी तक तार फैंसिंग नहीं कराई गई हैं। ऐसे में शहर के लोगों के लिए अवैधानिक कृत्य के लिए यह क्षेत्र काफी सुरक्षित दर्जन आ रहा है और शाम होती ही यहां पर युवाओं का आना जाना लगा रहता है। वहीं दिन में लकडिय़ां ले कर लोग आसानी से निकाल रहे हैं। जिसपर विभाग की ओर से रोक नहीं लग पा रही है। हाइवे से जंगल में अंदर जाने के दर्जन भर से अधिक सुगम रास्ते भी बन चुके है जिससे लोगों को बिना किया परेशानी के आने जाने की सुविधा मिल रही है।