
बंद पड़ा क्रशर प्लांट
जिले के खनिज उद्योग को उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) शुल्क में वृद्धि के फैसले के बाद गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। यूपी सरकार ने आईएसटीपी शुल्क को 100 रुपए प्रति घनमीटर से बढ़ाकर 150 रुपए किया है, इस कदम का सबसे बड़ा असर जिले के क्रशर उद्योग और खनिजों के व्यापार पर पडऩे लगा है। जिले से यूपी जाने वाले गिट्टी, मुरम, रेत और अन्य खनिजों का अधिकांश व्यापार इस फैसले से प्रभावित होने वाला है, जिससे उद्योगों को आर्थिक और परिचालन दोनों मोर्चों पर दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
पहले से ही जिले का क्रशर उद्योग दबाव में था। यूपी के कन्वर्जन फैक्टर और पहले से ही 100 रुपए प्रति घनमीटर आईएसटीपी शुल्क के चलते छतरपुर में संचालित 2५ क्रेशर प्लांट बंद हो चुके हैं। इसके परिणामस्वरूप हजारों श्रमिकों का पलायन हुआ है और स्थानीय रोजगार संकट गहराता जा रहा है। अब शुल्क में और वृद्धि के बाद जिले के उद्योग पूरी तरह अस्तित्व संकट में हैं। यूपी प्रशासन ने एक बार फिर आईएसटीपी शुल्क बढ़ा दिया है, जिसके अनुसार अब मध्यप्रदेश के खनिज वाहनों से 150 रुपए प्रति घनमीटर टैक्स वसूला जाएगा। इससे खनिजों के परिवहन का खर्च बढ़ गया है और यूपी में व्यापार घाटे का सौदा बन गया है। इसके साथ ही यूपी और मध्यप्रदेश के बीच कन्वर्जन फैक्टर का अंतर भी बढ़ गया है, जो व्यवसायियों के लिए और परेशानियों का कारण बन रहा है।
सिर्फ गिट्टी ही नहीं, बल्कि मुरम और मिट्टी पर भी यूपी के खनिज विभाग द्वारा टैक्स लगाया जा रहा है। इससे व्यापारियों की समस्याएं और बढ़ गई हैं। पहले यूपी में एमपी और अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से 100 रुपए प्रति घनमीटर टैक्स लिया जा रहा था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 150 रुपए कर दिया गया है। यह बदलाव खासतौर पर गिट्टी, रेत और मुरम के कारोबारियों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।
स्थानीय उद्योग और रोजगार पर इसका प्रभाव सीधे दिखाई दे रहा है। छतरपुर क्रशर एसोसिएशन के पदाधिकारी इस फैसले के खिलाफ खड़े हो गए हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष अमर सिंह, उपाध्यक्ष पंकज भसीन और सचिव संजय जोशी ने यूपी सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा की है और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है।
क्रशर एसोसिएशन के मुताबिक, यूपी में वाहनों की क्षमता 1.64 टन और एमपी के वाहनों की क्षमता 1.41 टन निर्धारित की गई है, जिससे भी व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। अब तक जिले में 23 क्रशर प्लांट बंद हो चुके हैं, और कई व्यापारी अपने प्लांटों को उखाडक़र अन्य जगहों पर शिफ्ट कर रहे हैं। क्रशर उद्योग के बंद होने से मजदूरों का पलायन भी जारी है। विशेषकर यूपी की सीमा से लगे प्रकाश बम्हौरी और दिदवारा मंडी में सिर्फ गिने-चुने क्रशर प्लांट ही बच गए हैं। इस संकट के कारण कई मजदूरों को रोजगार मिलना बंद हो गया है, और वे काम की तलाश में अन्य स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
उत्तरप्रदेश में ट्रांजिट शुल्क बढ़कर 100 रुपए से 150 रुपए प्रति घनमीटर हो गया। जब मध्यप्रदेश से गिट्टी यूपी भेजी जाती है, तो प्रत्येक घनमीटर पर अतिरिक्त 50 रुपए टैक्स देना पड़ता है। इसका मतलब है कि पहले जो 100 रुपए लागत थी, अब 150 रुपए हो गई। अगर एक ट्रक में 20 घनमीटर गिट्टी जाती है, तो अतिरिक्त टैक्स 20 × 50 = 1000 रुपए बनता है। यह अतिरिक्त खर्च व्यापारी को गिट्टी की कीमत बढ़ाने पर मजबूर करता है। इसलिए, मूल उत्पादन लागत और परिवहन लागत मिलकर गिट्टी की बिक्री मूल्य बढ़ा देते हैं। इस तरह ट्रांजिट शुल्क की वृद्धि सीधे गिट्टी महंगी होने का कारण बनती है।
फैक्ट फाइल
शुल्क दर (पूर्व)- 100 रुपए प्रति घनमीटर
शुल्क दर (वर्तमान)- 150 रुपए प्रति घनमीटर
पहले बंद क्रशर प्लांट- 25 प्लांट
मजदूर प्रभावित - 1000
वाहन क्षमता यूपी वाहन- 1.64 टन, एमपी वाहन- 1.41 टन
क्रशर एसोसिएशन ने यूपी सरकार के इस फैसले के खिलाफ एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट से न्याय की गुहार लगाई है। एसोसिएशन का कहना है कि इस बढ़ी हुई टैक्स दर के कारण जिले क्रशर उद्योग पर गहरा असर पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हो गई है। डिप्टी डायरेक्टर, माइनिंग अमित मिश्रा ने कहा कि हम क्रशर और खनिज कारोबारियों की समस्याओं को प्रशासन के माध्यम से शासन तक पहुंचाएंगे। एसोसिएशन और व्यापारियों का मानना है कि यदि शीघ्र इस मुद्दे का समाधान नहीं निकाला गया, तो क्रशर उद्योग और संबंधित क्षेत्रों में बेरोजगारी और आर्थिक संकट और बढ़ सकता है।
Published on:
10 Jan 2026 10:45 am
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