
मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए ठेका कंपनी द्वारा लगाया गया सेटअप
छतरपुर. शहरवासियों के लिए अच्छी खबर है। काफी जद्दोजहद के बाद मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग का काम फिर से शुरू हो गया है। मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग दो साल में बनकर तैयार हो जाएगी। मेडिकल कॉलेज के निर्माण का री-टेंडर हुआ है। मजेदार बात यह है कि री-टेंडर के पहले भी गुजरात की कंस्ट्रक्शन कंपनी जेपी इंफ्रा को ठेका दिया गया था और री-टेंडर के बाद भी इसी कंपनी ने ठेका हासिल किया है। इस बार राजकोट की मलानी कंस्ट्रक्शन ने भी निविदा डाली थी लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर दोबारा हुए टेंडर
गौरगाय में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के निर्माण का काम जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर ने पूर्व में यह कहकर करने से मना कर दिया था कि मटेरियल के दाम बढ़ चुके हैं, इसलिए ठेके की दरें भी बढ़ाई जाएं। इसी बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की दो जून को छतरपुर यात्रा के एक दिन पहले पीआईयू ने नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी थी। पुराने ठेकेदार द्वारा यह आपत्ति लगाई गई थी कि पहले उसका भुगतान करें एवं टेंडर निरस्त करें, तभी दूसरा टेंडर बुलाएं। इस आपत्ति के बाद टेंडर प्रक्रिया उलझकर रह गई थी। हालांकि इसके बाद राज्य शासन ने बजट बढ़ाकर 247 करोड़ कर दिया है, जबकि पहले 216 करोड़ था। इसके बाद री-टेंडर हुआ है।
हाईकोर्ट में याचिका से भी देरी हुई
दरअसल मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य काफी पहले शुरू हो गया था। सब कुछ ठीक चल रहा था कि इस बीच किसानों ने जमीन मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगा दी, इसके चलते काम बंद हो गया था और मजदूर बापस अपने घर चले गए थे। हाला ही में हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेज के निर्माण को चुनौती देने वाली पांच याचिकाओं को खारिज करते हुए पिटिशनरों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद काम दोबारा शुरू किया गया था। कलक्टर ने मौके पर पहुंचकर मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए जरूरी हर सुविधा के क्लियरेंस के लिए संबंधित विभाग को निर्देश दिए थे। आननफानन में काम भी शुरू करा दिया था। उस समय निर्माण एजेंसी का कहना था कि होली के कारण लेबर साइट नहीं आ रही है। बाद में कंपनी ने काम करने से इनकार कर दिया।
2025 से एडमिशन के लिए डीन की नियुक्ति जरूरी
लेटलतीफी के चलते मेडिकल कालेज कैंपस अब 2024 के बजाए वर्ष 2025 तक बनकर तैयार हो पाएंगे और 2025 में ही एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए प्रवेश भी शुरू हो जाएंगे। इसके पहले इन कालेजों के लिए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जिससे एमसीआई इन्हें संचालित करने के लिए अनुमति दे सके। मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए 1200 कर्मचारियों की नियुक्ति जरूरी है। इसमें 155 टीचिंग स्टाफ रहना चाहिए। इनमें लैक्चरर और प्रोफेसर शामिल हैं। इसके अलावा पैरामेडिकल स्टाफ, क्लेरिकल और चतुर्थ श्रेणी स्टाफ भी रहेगा। हालांकि डीन की नियुक्ति का इंतजार है। शुरुआत में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डीन को ही चार्ज दिया गया था। बाद में वापस ले लिया गया। चिकित्सा शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक डीन की नियुक्ति का मामला लंबित है।
3 साल तक चला मेडिकल कॉलेज के लिए आंदोलन
छतरपुर समेत आसपास के जिले के लोगों के लिए मेडिकल हब बन चुके छतरपुर में मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर जनता ने दो चरणों में बड़े आंदोलन किए। आंदोलन में सभी राजनीतिक दलों के नेता, समाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक, व्यापारी, नौकरी पेशा समेत सभी वर्ग के लोग शामिल हुए। प्रदर्शन किए गए, धरने पर बैठे, मानव श्रंखला बनाई गई, कैंडल मार्च निकाला गया, हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। यहां तक कि शहर बंद रखा गया। पहले चरण की तरह ही दूसरे चरण में भी इसी तरह से आंदोलन किया गया। वर्ष 2015 से 2018 तक लगभग सौ से ज्यादा प्रदर्शन आम जनता के द्वारा किए गए थे। जिसके बाद 15 अगस्त 2018 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह लाल परेड ग्राउंड भोपाल में छतरपुर मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की। 30 सितंबर को चुनाव के पहले तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने छतरपुर मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास भी किया। इसके बाद शिवराज सरकार कैबिनेट ने 4 अक्टूबर 2018 को 300 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति भी दी।
इनका कहना है
मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू किया गया है। एग्रीमेंट के तहत 24 महीने में बिल्डिंग बनकर तैयार होगी।
केएस परस्ते, इइ, पीआइयू
फोटो- सीएचपी२५०९२३-71- मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए ठेका कंपनी द्वारा लगाया गया सेटअप
Published on:
25 Sept 2023 10:58 am
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