
अवधकुंड धाम मंदिर व कुंड
छतरपुर. चंदला तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत रावपुर की सीमा में विशाल पर्वत के सिखर पर अवधकुंड धाम स्थित है। यहां हजारों वर्ष पुराने राम-जानकी मंदिर के साथ चरण पादुका मंदिर, शंकर भगवान मंदिर, हनुमान जी मंदिर, झारखंड मंदिर, कबीर मंदिर, सिद्ध बाबा, मकरद्ध्वज, छटी दाई के स्थान हैं।
पर्वत के सिखर पर अवधकुंड, दूध कुंड, लाल माटी कुंड के साथ बुड्ढ़ा-बुड्ढ़ी तालाब सहित अन्य तालाब भी मौजूद हैं। आनंद रामायण ग्रंथ अनुसार त्रेतायुग में वन गवन जाते समय भगवान राम जानकी ने पर्वत के सिखर पर अवधकुंड की उत्पत्ति की थी और सन्यासिन अवधिया दाई को वनवास के बाद लौट कर मिलने को कहा था। तब से इस पहाड़ी का नाम अवधकुंड के नाम से जाना जाने लगा। यहां के पुजारी ने बताया कि इस पर्वत की साढ़े ४ कोष की परिक्रमा लगाने से चित्रकूट धाम की परिक्रमा लगाने के बराबर धर्म लाभ मिलता है, क्योंकि भगवान राम यहां रुके थे। अवधकुंड का शीतल जल गंगा जल के जैसा है, यह जल कई दिनों तक बोतल रखने के बाद भी हमेशा स्वच्छ ही रहता है।
क्षेत्र के लोगों ने बताया कि यहां पर प्रतिदिन के साथ-साथ हर अमावस्या को हजारों श्रद्धालु आते हैं। यहां पर मकर संक्रांति के दिन विशाल मेले का भी आयोजन कराया जाता है। यहां पहुंचने के लिए चंदला बाईपास से एक किलोमीटर कच्चा रास्ता फिर सीधी पहाड़ी पैदल चढ़ाई ६ सौ मीटर व चंदला रावपुर मार्ग से २ किलोमीटर कच्चा रास्ता है। लेकिन यहां पर क्षेत्रीय प्रशासन की ओर से विकास कार्य नहीं किए गए हैं।यहां के विकास के लिए हमेशा से ही स्थानियों लोगों ने आवाज उठाई। लेकिन अभी तक सिर्फ आश्वासन की मिल सके। हालाकि स्थानीय लोगों के सहयोग से छोटे-छोटे विकास कार्य कराए जाते हैं।
२५ वर्ष पहले मंदिर में हुई थी चोरी
अवधकुंड धाम स्थित राम जानकी मंदिर से लगभग २५ वर्ष पहले भगवान राम जानकी, लक्ष्मण जी की अष्टधातु की मूर्तियां चोरी हो गई थीं। उस समय वहां निवासरत संत कड़ुअल बाबा ने पुलिस थाना चंदला में चोरी की शिकायत की। पुलिस ने छानबीन कर अवधकुण्ड पर्वत से निकले नाले के पास से रेत में दबी भगवान की मूर्तियां बरामद की और मंदिर के पुजारी को सौंप दीं थीं। तब क्षेत्र के लोगों की सहमति से मंदिर के भगवान फिर चोरी न हो जाएं, इस बात के डर से चंदला के नरसिंह भगवान के मंदिर में अवधकुंड धाम स्थित राम जानकी मंदिर के भगवान की मूर्तियों की स्थापना करवाई थी। जिनका विमान हर वर्ष जल विहार मेले में निकलता है, मंदिर के रखरखाव व सुरक्षा को ७ बीघे जमीन अवधकुंड धाम के नाम दर्ज है, जिसका कब्जा मंदिर प्रसाशन के पास है। अब लोगों की मांग है कि अवधकुंड धाम में विकास और सुरक्षा कर अवधकुंड धाम के मंदिर में ही मूर्तियां की स्थापना कराई जाए।
चोरी के बाद अवधकुण्ड नहीं पहुंचे भगवान
साढ़े चार कोष परिक्रमा के दायरे में फैला अवधकुंड धाम पहाड़ जंगल क्षेत्र में आता है। इस पहाड़ के शिखर में बने राम जानकी मंदिर से अष्टधातु के भगवान चोरी के बाद लौट कर नहीं आए, उनकी जगह मंदिर में सामान्य पत्थर के भगवान बिराजमान कराया। जिसके बाद से वहां से जल बिहार मेले में बिमान निकलना बंद हो गया है। अवधकुंड पहाड़ से निकले नाले में भगवान की चोरी हुई अष्टधातु की प्राचीन मूर्तियां मिलने के बाद उन्हें सुरक्षात्मक चंदला नगर के नरसिंह भगवान के मंदिर में रख कर पूजा की जाने लगी और परम्परागत जल बिहार मेले में अवधकुंड धाम का विमान नरसिंह भगवान के मंदिर से नरसिंह भगवान के विमान के साथ निकलने लगा।
Published on:
26 Aug 2023 06:54 pm
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