
सवा एकड़ भूमि पर बने मैरिज गार्डन और बेयर हाउस को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया
छतरपुर। जिले में इन दिनों सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अभियान चलाकर की जा रही है। इसी अभियान के तहत रविवार को घुवारा में सवा एकड़ भूिम पर बने मैरिज गार्डन और बेयर हाउस को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि जमीन की दो बार नापतौल की गई, जिसमें सरकारी जमीन पर निर्माण पाए जाने पर नोटिस और बेदखली नोटिस देने के बाद कार्रवाई की गई है। जबकि मैरिज गार्डन के मालिक का आरोप है कि उपचुनाव में उन्होंने कांग्रेस कार्यालय के लिए किराए पर जगह दी और कांग्रेस का समर्थन किया, इसलिए राजनीतिक इशारे पर प्रशासन ने कार्रवाई की है।
ये है पूरा मामला
घुवारा तहसील मुख्यालय पर भगवां रोड पर निर्मल जैन ने 2006 और 2010 में लक्ष्मण घोषी से जमीन खरीदी थी। खसरा नंबर 1217/२ और 1217/१/२ कुल रकवा 0.403 हेक्टेयर खरीदकर उन्होंने इस पर बेयर हाउस और मैरिज गार्डन का निर्माण कराया है। जमीन खरीदने के सम्पूर्ण दस्तावेज, नामांतरण और सीमांकन संबंधी दस्तावेज उनके पास है। लेकिन 23 जनवरी को जारी आदेश को 25 जनवरी को आवेदक को भेजा गया। जिसमें तहसीलदार घुवारा सुनील वर्मा ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का नोटिस जारी किया। इसके बाद 28 जनवरी को बेदखली आदेश जारी किया और 31 जनवरी को एसडीएम की मौजूदगी में भारी पुलिस बल के सहयोग से मैरिज गार्डन और बेयर हाउस को सरकारी जमीन खसरा नंबर 1201/१ कुल रकवा 2.529 हेक्टेयर में से 0.300 हेक्टेयर जमीन पर निर्माण बताकर ध्वस्त कर दिया।
ये है आरोप
मैरिज गार्डन के मालिक निर्मल जैन ने आरोप लगाया है कि उपचुनाव के दौरान कांग्रेस कार्यालय के लिए उन्होंने मैरिज गार्डन किराए पर दिया था। वहीं कांग्रेस का प्रचार भी किया और अब नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार है, इसलिए राजनीतिक दवाब में प्रशासन ने बिना मौका दिए या उनका पक्ष सुने ही उनका मैरिज गार्डन व बेयर हाउस तोड़ दिया। उनका ये भी आरोप है कि प्रशासन की टीम ने जमीन का दो बार सीमांकन किया, लेकिन उन्हें नहीं बुलाया गया। न ही उन्हें अपना सामान निकालने का पर्याप्त समय दिया गया। उन्होंने ये भी आरोप लगाया है कि उन्होंने तहसीलदार के आदेश पर रोक लगाने और जांच कराने के लिए एसडीएम, एडीएम और कलेक्टर को भी आवेदन दिया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया, लेकिन इधर स्थानीय प्रशासन ने मौका दिए बिना कार्रवाई कर दी।
प्रशासन की ये है सफाई
बड़ामलहरा एसडीएम नाथूराम गौड़ का कहना है कि तहसीलदार सुनील वर्मा ने अतिक्रमण की जानकारी मिलने पर नोटिस जारी किया था। उसके बाद राजस्व संहिता के नियमानुसार उन्हें अंतिम नोटिस व बेदखली आदेश दिया गया। लेकिन उन्होंने अतिक्रमण नहीं हटाया जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 300 आरे सरकारी जमीन को खाली कराया है।
Published on:
31 Jan 2021 08:16 pm
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