
Bundeli Lok culture blossomed from Naura and Dadra
छतरपुर। पर्यटक ग्राम बसारी में चल रहे 22वें बुन्देली उत्सव में बीती शाम लोक गायन और लोक नृत्यों के नाम रही। बुन्देलखण्ड के विभिन्न कोनों से आए कला मंडलों ने अपनी लोक गायकी और लोक नृत्यों के माध्यम से बुन्देलखंड का लोक साहित्य परोस दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाज सेवी अजय पाल सिंह राव थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में आकाशवाणी अधिकारी हीरालाल अहिरवार, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनोज त्रिवेदी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता देवेन्द्र प्रताप सिंह ने की। इस अवसर पर बुन्देली विकास संस्थान की ओर से पूर्व विधायक शंकर प्रताप सिंह मुन्ना राजा एवं अन्य अतिथियों ने प्रतिभाओं को सम्मानित किया। बुन्देली इतिहास के लिए इंदौर में निवासरत एवं बुन्देलखंड की बेटी सुधा चौहान को दीवान प्रतिपाल सिंह बुन्देला स्मृति सम्मान भेंट किया गया। श्रीमती चौहान ने महोबा नामक पुस्तक लिखकर महोबा को एक नई दृष्टि से देखा है। उनके साथ ही बुन्देली साहित्य सृजन के लिए डॉ. वीरेन्द्र निर्झर बुरहानपुर को राव बहादुर सिंह बुन्देला स्मृति सम्मान से नवाजा गया।
बुन्देली टीमों ने बांधा समा:
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों के स्वागत सम्मान के उपरांत बीती शाम बुन्देली उत्सव के मंच पर बुन्देली लोक नृत्यों एवं गायन की धूम रही। सबसे पहले सागर से आए लखनलाल समूह ने बधाई, नौरता छतरपुर के स्वर्ण मंदिर ग्रुप ने बधाई नृत्य प्रस्तुत किया। तदोपरांत रज्जू राजा एवं बलवीर सिंह टीकमगढ़ ने दादरा, बेटीबाई एवं सखियों व मक्खी बाई एवं सखियों के द्वारा लोक गायन गारी में तीखे अंदाज प्रस्तुत किए। इसी तरह भगवानदास एंड पार्टी के द्वारा दिवारी, सपना रंगमंच एवं कंदू रैकवार द्वारा बुन्देली कीर्तन की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बहादुर सिंह परमार एवं आकाशवाणी के बुन्देली उद्घोषक जगदीश गंगेले ने किया। अतिथियों का स्वागत संस्थान के अध्यक्ष आदित्य शंकर बुन्देला, अजातशत्रु, लखन दुबे, हिमालय यादव, प्रभु यादव, जिला पंचायत सदस्य दरवारी कुशवाहा ने किया।
सबको भाये ठड़ूला और खांकरा, अश्व नृत्य ने मचाई धूम :
मंगलवार को दिन में बुन्देली उत्सव बसारी में दो आकर्षक प्रतियोगिताएं हुईं। महिलाओं ने जहां विभिन्न प्रकार के बुन्देली व्यंजन बनाकर लोगों को ठड़ूला और खांकरा का स्वाद चखाया। बुंदेली व्यंजनों के स्टॉल पर एक से बढ़कर एक व्यंजन परोसे गए। लोगों ने यहां पहुंचकर बुंदेली व्यंजनों का जायका लिया और प्रतियोगियों का उत्साह बढ़ाया। दूसरी ओर दोपहर में स्टेडियम में शुरू हुई अश्व नृत्य प्रतियोगिता में दर्जनों घोड़ों ने ढोल पर नृत्य दिखाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। दूर-दूर से आये घोड़े सजे-धजे रंग बिरंगे पोशाकों में थे। यह प्रतियोगिता देर शाम तक चलती रही।
निशानेबाजी और लोक नृत्य राई के साथ समापन आज :
बुन्देली उत्सव में बुधवार को दोपहर 12 बजे से निशानेबाजी प्रतियोगिता शुरू होगी। बुन्देली विकास संस्थान की ओर से अतीन्द्रमणी त्रिपाठी ने बताया कि बुन्देली उत्सव का समापन समारोह लोक नृत्य राई के साथ होगा। इसके पूर्व शाम साढ़े 7 बजे फाग का आयोजन भी होगा। उन्होंने बुन्देली कला के प्रेमियों को कार्यक्रम में शामिल होने की आपील की है।
Published on:
21 Feb 2018 03:08 pm
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