छतरपुर। बुंदेलखंड की बहू प्रमिला मिश्रा को एक ही सप्ताह में दो नेशनल और इंटरनेशनल अवॉर्ड मिले हैं। ग्लोबल गुरू और आदर्श महिला इंटरनेशनल वूमन अचीवर्स अवॉर्ड पाने वाली प्रमिला मिश्रा बुंदेलखंड की पहली महिला है। प्रमिला को यह अवॉर्ड उनके द्वारा किए गए विशिष्ट कार्यों क लिए दिए गए हैं। एक सप्ताह पहले ही प्रमिला को अंतर्राष्ट्रीय समन्वय में उत्कृष्टता के लिए दिल्ली में ग्लोबल गुरु अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
शनिवार को उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘आदर्श महिला इंटरनेशनल वूमन अचीवर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें जीवन में आने वाली चुनौतियों और समाज में एक रोल मॉडल बनकर मजबूती से खड़े होने के लिए सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इन्द्रेशकुमार और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा रेखा शर्मा के हाथों एक बड़े समारोह में डॉ. प्रमिला को यह पुरस्कार प्रदान किया गया। इसमें महिला सम्मान के लिए 25 महिलाएंं भारत वर्ष से एवं 12 महिलाएं विदेशों से सम्मानित हुई हैं। यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य के लिए आदर्श महिला के रूप में दिया गया। यह कार्यक्रम लीगल राइट्स कौंसिल-इंडिया द्वारा आयोजित किया गया था। इसी सप्ताह डॉ. प्रमिला को नई दिल्ली में ‘ग्लोबल गुरु कान्क्लेव 2019Ó में Óग्लोबल गुरु अवॉर्डÓ से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली के इरोज होटल, नेहरू प्लेस में 26 जुलाई को उन्हें यह पुरस्कार दिया गया। इस समारोह में दस देशों के शिक्षक, शिक्षाविद् व शिक्षा क्षेत्र की बड़ी हस्तियों ने भाग लिया। प्रमिला ने हालही मेंं केंद्रीय विद्यायल से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर अपना शेष समय पूर्ण रूप से समाज सेवा के लिए समर्पित किया है। प्रमिला मिश्रा, स्व.पं. गणेश प्रसाद मिश्र एवं शांति मिश्रा की इकलौती बहू हैं । आदर्श शिक्षिका के साथ-साथ, आदर्श गृहणी के रूप में वे धवर्रा (नौगांव) में पं. गणेश प्रसाद मिश्र, सेवा न्यास के कार्यों में सक्रिय हैं। अपने पति डॉ. राकेश मिश्र व पुत्र संकल्प के साथ गरीब कल्याण के लिए स्वच्छता अभियान, अभी तक आठ स्वास्थ्य शिविर, पौधारोपण, कृषक प्रशिक्षण, प्रयागराज कुंभ में तीर्थ यात्रियों के लिए नि:शुल्क आवास, भोजन की दो माह तक व्यवस्था जैसे सेवा कार्यों में हाथ बटाया है।
प्रमिता मिश्रा आदर्श शिक्षण, ग्रहणी से समाजसेवा तक :
प्रमिला मिश्रा एक आदर्श शिक्षिका हैं। केन्द्रीय विद्यालय संगठन में पच्चीस वर्षों तक अलग-अलग विषयों पर उल्लेखनीय योगदान किया है। उन्होंने कई राष्ट्रीय एवं अंतराज़्ष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार प्राप्त किए हैं । उन्होंने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से गणित एवं अंग्रेजी दो विषयों में स्नातकोत्तर तक की शिक्षा, प्रथम श्रेणी में प्रावीण्य सूची सहित प्राप्त की है। अच्छी शिक्षिका, लेखिका, नवाचार के प्रयोगों से रुचिकर विषय, शिक्षा प्रबंधन, तनाव रहित परीक्षा तैयारी जैसे विषयों में विशेष योग्यता है। सम-सामयिक विषयों पर उनका लेखन एवं चिंतन होता है। सी.बी.एस.ई. एवं एन.सी.ई.आर.टी. की पाठ्यक्रम निर्माण, परीक्षा प्रश्नपत्र निर्माण जैसी समितियों में कई वर्षों से अपनी सेवाएं दे रही हैं । सामाजिक मूल्यों एवं बालिका शिक्षा में नवीन प्रयोग उनके प्रमुख विषय हैं। रुचिकर अंग्रेजी बनाने में उनकी छोटी-छोटी अभिनीत भूमिकाएं हैं । भारतीय ग्रामीण परिवेश में अंग्रेजी से डरने वाले बच्चों में रुचि जागृत कर विगत बीस वर्षों में शतप्रतिशत परिणाम उनकी कुशल योग्यता को दर्शाता है। रुचिकर पाठ्यक्रम, परीक्षा की भय रहित तनाव रहित तैयारी में उनको राष्ट्रीय स्तर का केन्द्रीय विद्यालय संगठन का पुरस्कार (2011) में तत्कालीन मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. राम शंकर कठेरिया द्वारा दिया गया । थिंकक्वेस्ट इंटरनेशनल कम्पटीशन 2011 में भारत को तीसरा पुरस्कार स्वयं एवं 6 बच्चों को दिया गया था । इसमें एक लैपटाप एक हजार डॉलर मूल्य का प्रदान किया गया। युवा संसद के सफ ल आयोजन एवं चार बार लगातार प्रथम स्थान प्राप्त करने पर तत्कालीन संसदीय कार्यमंत्री सुरेश पचौरी ने 2006 में सम्मानित किया था।