
ई-गेट
जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन द्वारा अपनाई गई हाईटेक तकनीक से बौखलाए माफिया ने अब सीधे सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर खनिज की चोरी रोकने के लिए लगाए गए आधुनिक ई-चेक गेट को ठप करने की नीयत से माफिया ने उसके केबल काट दिए। इस पूरी वारदात का खुलासा वहां लगे सीसीटीवी कैमरों से हुआ है, जिसमें चार नकाबपोश बदमाश एक पोकलैन मशीन पर चढकऱ तारों को काटते हुए साफ नजर आ रहे हैं। इस मामले में प्रशासन की मुस्तैदी के बाद चार अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
खनिज विभाग ने जिले में अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग पर शिकंजा कसने के लिए हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित मानव रहित ई-चेक गेट स्थापित किए हैं। यह व्यवस्था मुख्य रूप से एमपी-यूपी बॉर्डर पर स्थित रामपुर घाट और लवकुशनगर के पुरा में शुरू की गई है। इस हाईटेक सिस्टम के कारण बिना रॉयल्टी और बिना नंबर प्लेट के धड़ल्ले से निकलने वाले वाहनों पर तीसरी आंख का पहरा बैठ गया था। अपनी चोरी पकड़े जाने के डर और भारी-भरकम जुर्माने से बचने के लिए बौखलाए माफिया ने इस पूरे डिजिटल नेटवर्क को ही ठप करने की साजिश रच डाली, ताकि सीमा पार खनिज की अवैध ढुलाई फिर से बिना किसी रुकावट के शुरू की जा सके।
डिजिटल निगरानी को पंगु बनाने के लिए माफिया के गुर्गों ने रात के अंधेरे का फायदा उठाया। ई-चेक प्वाइंट के पास खड़ी एक पोकलैन मशीन का सहारा लेकर चार नकाबपोश बदमाश ऊपर चढ़े और ई-गेट को कंट्रोल रूम से जोडऩे वाले मुख्य केबलों को काट दिया।
खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन ने जब सिस्टम ठप होने के कारणों की जांच की, तो सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर इस पूरी करतूत का भंडाफोड़ हुआ। फुटेज में चारों नकाबपोश तार काटते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं। इस दुस्साहस को लेकर विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद चार अज्ञात हमलावरों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।
अवैध परिवहन को रोकने के लिए तैयार की गई इस नई व्यवस्था के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही थी।
एआई टैग अनिवार्य- खनिज परिवहन करने वाले सभी वाहनों के फ्रंट विंडशील्ड पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन यानी एआई टैग लगाना अनिवार्य किया गया है।
स्वचालित चालान- जैसे ही कोई वाहन ई-चेक गेट से गुजरता है, सिस्टम स्वत: ही गाड़ी की रॉयल्टी, ओवरलोडिंग और रजिस्ट्रेशन की पूरी जानकारी दर्ज कर सीधे भोपाल स्थित कंट्रोल रूम भेज देता है, जहां से सीधे वाहन मालिक के पते पर चालान पहुंचता है।
कार्रवाई का असर- इस तकनीक की मदद से हाल ही में खनिज विभाग ने बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के खनिज का परिवहन कर रहे 13 हाइवा और डंपर को ट्रेस किया था, साथ ही दो ओवरलोड डंपरों पर भी बड़ी कार्रवाई की गई थी। इसी कार्रवाई से घबराकर माफिया ने इस घटना को अंजाम दिया।
अमित मिश्रा (डिप्टी डायरेक्टर, माइनिंग, छतरपुर) के अनुसार एआई की तकनीक से अवैध परिवहन और ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई के लिए डिजिटल मदद मिलने लगी है। भोपाल के कंट्रोल रूम से इनपुट मिलने के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के दौडऩे वाले वाहनों को भी जल्द ही ट्रेस कर लिया जाएगा। सरकारी सिस्टम को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।
Updated on:
03 Jun 2026 10:50 am
Published on:
03 Jun 2026 10:38 am
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