
गैंबलिंग
छतरपुर. बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग की लत व उसके दुष्परिणाम देखने को मिले हैं। लेकिन अब युवाओं व किशोरों को माता-पिता को सावधान होने की जरूरत है। इन दिनों किशोरों और युवाओं पर ऑनलाइन गैंबलिंग का भूत सवार है। खासकर कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों के हाथों में मोबाइल फोन पहुंचा तो छतरपुर जैसे छोटे शहर में भी इस तरह के मामले तेजी से सामने आने लगे हैं। ५०० वेबसाइट के जरिए देश में ऑनलाइन गैंबङ्क्षलग चल रही है। जब किशोर और युवाओं में इसकी लत पड़ जाती है तो ये बीमारी बन जाती है। जिसे पैथोलॉजिकल गैंबलिंग कहते हैं।
नुकसान के ज्यादा चांस
ऑनलाइन गैंबलिंग मानव कौशल पर आधारित न होकर संयोग पर आधारित है इसलिए इसे जुआ की परिभाषा में माना जाता है। इसके तहत एक रंग लाल या हरा चुनना होता है। हरे रंग के आने पर आर्थिक लाभ और लाल न आने पर आर्थिक हानि होती है। पहले युवाओं को 7 व 3 के आधार पर लाभ और बाद में 3 व 7 के अनुपात में सुनियोजित हानि होती है। इस खेल में कभी-कभी वेबसाइट बंद हो जाती है और दूसरी खुल जाती है। ऐसा होने पर खेलने वाला बहुत आर्थिक नुकसान उठाता ही है।
500 से ज्यादा ऑनलाइन वेबसाइट
ऑनलाइन वेबसाइट के जरिए 1100 करोड़ का खुलासा हैदराबाद पुलिस कर चुकी है। कोरोना काल में बैठे 17 साल से 25 साल के युवाओं को यह ऑनलाइन कंपनियां टारगेट कर रही हैं। प्रयागराज के भी कुछ युवाओं को इन कंपनियों द्वारा लाखों का नुकसान पहुंचाया गया है। ऑदेश और प्रदेश में लगभग 500 वेबसाइट पर ऑनलाइन गैंबलिंग चल रही हैं। जो भारत में गैंबलिंग एक्ट 1867 के प्रावधानों के विपरीत और दंडनीय है।
ऑनलाइन विज्ञापन से खिंच रहे किशोर व युवा
आजकल मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलकर पैसे जीतने के कई विज्ञापन आते रहते हैं। पैसे कमाने के लालच में 14 साल के किशोर से लेकर 18 से अधिक उम्र के युवा तक ऑनलाइन गेम खेलना शुरू कर देते हैं। शुरू में कुछ पैसे जीत जाते हैं तो गेम खेलने में और मन लगने लगता है। जब पैसे हारना शुरू करते हैं तो नुकसान की भरपाई करने के लिए बड़े-बड़े दांव लगाने लगते हैं। ऐसे में कई युवा लाखों रुपए फूंकने के बाद कर्जदार भी हो गए हैं, क्योंकि उन्होंने अपने दोस्तों, परिचितों से पैसे उधार लेकर भी ऑनलाइन गेम में दांव लगा दिया। ऑनलाइन कसीनो समेत अलग-अलग गेम खेलने के लिए पैसे इक_ा करने को किशोरों, युवाओं ने घरों के सामान से लेकर रिश्तेदारों के खाते तक से पैसे निकालने लगे हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि कोरोना काल के पहले बुंदेलखंड के जिलों में इस तरह के मामले सामने नहीं आते थे। लेकिन पिछले एक साल से हर महीने एक-दो केस मिल रहे हैं।
गेमिंग बिहेवियर पर नजर रखें
आपको इस बात पर नजऱ रखनी चाहिए कि बच्चा कब और कितनी देर तक गेम खेलता है। यदि वह गेम खेलने में घंटों समय बिता रहा है, तो टाइम लिमिट सेट करें। अपने बच्चे को समझाएं कि गेमिंग केवल एंटरटेनमेंट का जरिया है , उनके जीवन का उससे कोई लेना देना नहीं है। अगर बच्चा गेमिंग में इतना ज्यादा व्यस्त है कि बाकी सभी कामों को अनदेखा करने लगा है, तो उसे बाहर जाने के लिए प्रोत्साहित करें। सिर्फ माता-पिता ही नहीं, बल्कि स्कूलों की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को स्पोट़र्स में पार्टिसिपेट करने के लिए प्रोत्साहित करें।
ऑनलाइन गेमिंग में शहर का बेटा गंवा चुका है जान
30 जुलाई 2021 को शहर के सागर रोड निवासी 13 साल के बच्चे ने ऑनलाइन गेम में 40 हजार रुपए हारने के बाद फंदा लगाकर जान दे दी। इस घटना में माता-पिता के इकलौते बेटे को खोने से पूरे शहर को झकझोर दिया था। लोग बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल देने के साथ सावधानी बरतने लगे, लेकिन अब किशोर व युवा ऑनलाइन गेमिंग के चक्कर में फंस रहे हैं। ऐसे में माता-पिता को बेटे-बेटी के मोबाइल इस्तेमाल पर नजर रखने और उन्हे समय समय पर जागरुक करने की जरूरत है।
इनका कहना है
पैथोलॉजिकल गैंबलिंग ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिस्ऑर्डर के तहत होने वाली बीमारी है। कोरोना काल के पहले ऐसे मामले सामने नहीं आते थे। मगर बच्चों के हाथ में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल पहुंचा तो अब हर महीने एक-दो केस सामने आने लगे हैं। डॉ. शिकाफा जाफरीन, मनोचिकित्सक, झांसी
Published on:
09 Sept 2023 12:09 pm
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