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जिले में पैर पसार रहा डेंगू, दो मरीज मिले, झांसी में चल रहा इलाज

सितंबर व अक्टूबर में मच्छरों के लार्वा से ज्यादा ख्रतरा, फॉगिंग और नाली की सफाई नहीं होने से बढ़ी समस्या

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Dangerous dengue two patients found in the district

Dangerous dengue two patients found in the district

धर्मेन्द्र सिंह
छतरपुर। डेंगू एक ऐसी बीमारी ,जो वायरल फीवर के जैसी नजर आती है। शरीर पर चक्कते आने के साथ ही धीरे-धीरे ब्लड के प्लेटलेट्स घटने लगते हैं। कुछ ही दिनों में यह बीमारी जान लेवा बन जाती है। यही डेंगू बीमारी जिले में पैर पसार रही है। पिछले दिनों हरपालपुर में मरीज सामने आने के बाद अब छतरपुर शहर में भी डेंगू का केस सामने आया है। डेंगू के मरीज सामने आने से स्वास्थ्य महकमे में ह़कंप मचा हुआ है। क्योकिं जिले में पिछले साल भी डेंगू के 4 मामले सामने आए थे। डेंगू के लिए सर्वाधिक खतरनाक समय सितंबर और अक्टूबर माह का होता है। इसी खतरनाक समय में डेंगू के मरीज मिलने से चिंता बढ़ गई है।
ये केस आए अभी सामने
हरपालपुर में शिक्षिका रुबी नाज को पिछले दिनों डेंगू की शिकायत होने पर झांसी ले जाया गया था। शिक्षिका की डेंगू जांच में आइजीजी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है,जबकि एनएसआइ और आइजीएम रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इस वजह से डेंगू का ये केस संदिग्ध माना जा रहा है। अभी इस केस की हिस्ट्री जांच हो नही पाई है,इसी बीच चौबे कॉलौनी के संजय तिवारी डेंगू से पीडि़त पाए गए। हालत बिगडऩे पर संजय को झांसी के रामराजा अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। संजय के पिता सुरेश तिवारी का कहना है कि जांच में डेंगू पाया गया है। झांसी में इलाज चल रहा है। रक्तवीर दल की मदद से एक यूनिट खून चढ़ाया गया है,एक यूनिट और चढाने की सलाह डाक्टर्स ने दी है।
हड़कंप मचने पर पूरे इलाके की हुई जांच
हरपालपुर में डेंगू मरीज पाए जाने के बाद जिला मलेरिया विभाग की टीम ने आसपास के 140 घरों की जांच की है। मलेरिया विभाग के मुताबिक मच्छरों के लार्वा पाए गए हैं,हांलाकि डेंगू जैसी बात सामने नहीं आई है। फिर भी ऐहतियात के तौर पर एंटी लार्वा का छिड़काव किया गया है। लोगों को पानी जमा न होने देने की सलाह दी गई है। मलेरिया विभाग की टीम अब चौबे कॉलौनी में सर्वे करेगी। ताकि डेंगू के लार्वा का स्तर और फैलाव का पता लगाया जा सके।
जिलेभर में मिले मच्छर के लार्वा
जिला मलेरिया विभाग द्वारा जनवरी 2018 से 12 सितंबर 2018 तक कराए गए सर्वे में मच्छरों के लार्वा पाए गए हैं। 9 माह में जिले भर में 95285 घरों के सैंपल लिए गए,जिसमें से 305 घरों में लर्वा मिले हैं। इसके अलावा 1 लाख 26 हजार 9 सौ 16 बर्तनों की जांच में २९६ में मच्छरों के लार्वा पाए गए । विभाग के मुताबिक घरों में 1.2 प्रतिशत और कंटेनरों में दशमलव 2 प्रतिशत लार्वा मिले हैं। लार्वा की इतनी मात्रा खतरनाक तो नहीं है,लेकिन लोगों में जागरुकता की कमी से लार्वा इकठ्ठा होने की प्रवृत्ति चिंताजनक है।
फॉगिंग और नाली सफाई न होना पड़ रहा भारी
छतरपुर शहर में फॉगिंग न होने और नालियों की महीनों तक सफाई न होने से मच्छर का लार्वा पनपता रहता है। शहर में कहीं भी सुबह-शाम और रात में खुले में खड़ा होना मुश्किल है,क्योकि मच्छरों की संख्या इतनी ज्यादा है कि काट-काटकर बेहाल कर देते हैं। इसके अलावा आमतौर पर लोग कूलर का पानी और बर्तनों, गमलों में रखा पानी आठ दिनों में नहीं बदलते हैं। सात दिन तक तो कोई समस्या नहीं होती है,लेकिन 8वें या 9वें दिन लार्वा से मच्छर पैदा हो जाते है,जो न केवल मलेरिया बल्कि डेंगू का कारण बनते हैं। सितंबर और अक्टूबर,ये दोनों ही माह वायरस के फैलने के लिए सबसे खतरनाक माने जाते हैं। शहर और कस्बों में नालियों की सफाई समय पर न होने और घरों में आठ दिन से ज्यादा समय तक पानी जमा रहने से मच्छर का लार्वा पनप जाता है।
एक साल तक जीवित रहता है डेंगू का अंडा
डेंगू का अंडा एक साल तक विपरीत परिस्थतियों में भी जिंदा रहता है। डेंगू मच्छर के अंडे खासतौर पर कूलर की खस या घास में इकठ्
ठा हो जाते हैं। और एक साल बाद भी अनुकूल परिस्थितयां मिलने पर इनसे लार्वा और फिर मच्छर जन्म लेता है। चीते जैसी धारियों वाला मादा एडीज इडिप्ट मच्छर ज्यादातर सुबह या दिन के समय काटता है। डेंगू का मच्छर ज्यादा उंचाई तक उड़ नहीं पाता है,इसलिए इसके द्वारा पैरों पर काटने के कारण डेंगू का लार्वा खून में मिल जाता है,जो ब्लड की प्लेटलेटस पर हमला करके उसे कम कर देता है। डेंगू तीन तरह के होते हैं। पहला क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार,दूसरा हैमरेजिक बुखार और तीसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम होता है। इन तीनों में से दूसरे और तीसरे तरह का डेंगू सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। साधारण डेंगू बुखार अपने आप ठीक हो जाता है और इससे जान जाने का खतरा नहीं होता,लेकिन अगर किसी को दूसरा और तीसरे तरह का डेंगू है और उसका फौरन इलाज शुरू नहीं किया जाता है,तो जान जा सकती है।
बुखार के साथ घट रही प्लेटलेट्स तो खतरा ज्यादा
तंदुरुस्त शरीर में डेढ़ से दो लाख प्लेटलेट्स होते हैं। प्लेटलेट्स बॉडी की ब्लीडिंग रोकने का काम करती हैं। अगर प्लेटलेट्स एक लाख से कम हो जाएं तो उसकी वजह डेंगू हो सकता है। अगर प्लेटलेट्स गिरकर 20 हजार तक या उससे नीचे पहुंच जाएं तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। 40-50 हजार प्लेटलेट्स तक ब्लीडिंग नहीं होती। डेंगू का वायरस आमतौर पर प्लेटलेट्स कम कर देता है, जिससे बॉडी में ब्लीडिंग शुरू हो जाती है।
इलाज में रखें ये सावधानियां
डॉक्टर एचपी अग्रवाल ने बताया कि शरीर में तेज दर्द के साथ बुखार आने और शरीर पर लाल धब्बे बनने पर तुरंत डाक्टर को दिखाना चाहिए। बुखार उतारने के लिए पैरासिटामोल और एटीबॉयोटिक दवाओं का इस्तेमाल मरीज को खुद से नहीं करना चाहिए। बाजार और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध डेंगू किट से जांच कराकर डॉक्टर की सलाह से ही दवा लेनी चाहिए। कई बार चौथे-पांचवें दिन बुखार कम होता है,तो लगता है कि मरीज ठीक हो रहा है, जबकि ऐसे में अक्सर प्लेटलेट्स गिरने लगते हैं। बुखार कम होने के बाद भी एक-दो दिन में एक बार प्लेटलेट्स काउंट टेस्ट जरूर कराना चाहिए।

डेंगू की शिकायत मिलने पर हरपालपुर आसपास के 140 घरों का सर्वे किया गया है। डेंगू का लार्वा नहीं मिला है। ऐहतियात के तौर पर एंटी लार्वा का छिड़काव भी किया गया है। इसके साथ ही मरीज की हिस्ट्री जानने के लिए मैं खुद जा रहा हूं । चौबे कॉलौनी वाले के स की जानकारी नहीं है,वहां भी सर्वे कराकर एंटी लार्वा फॉगिंग कराई जाएगी।
डॉ.एस.एस.चौरसिया,जिला मेलरिया अधिकारी